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सोने से पहले करें ये काम तो सुख सुविधाओं में होगी वृद्धि

04 Jul 2018
शास्त्रों में है रात्रि प्रहर का ‘विशेष महत्व’

JULY 04 (WTN) - हिन्दू धर्म में सूर्योदय और सूर्यास्त का काफी महत्व है। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के समय को शास्त्रों में ‘दिवस’ कहा गया है। इसके बाद दिवस को ‘प्रहर’ में बांटा गया है। एक प्रहर लगभग तीन घण्टे का होता है। इस तरह दिन और रात मिलाकर पूरे 24 घण्टे में आठ प्रहर होते हैं। चार प्रहर दिन के और चार प्रहर रात के। 

सूर्योदय के बाद का पहला प्रहर देवताओं की उपासना माना गया है। वहीं पांचवें और छठे प्रहर को ‘रात्रि’ कहा गया है। रात्रि का सम्बन्ध कामदेव की पत्नि ‘रती’ से है। कहा जाता है कि ‘रात्रि’ शब्द ‘रती’ से ही बना है। शास्त्रों में लिखा गया है कि रात्रि के समय कुछ ऐसे काम करना चाहिए जिससे जीवन में सुख सुविधाएं और धन की प्रचुरता रहती है।

1.सोने से पहले हमेशा पैर धोना चाहिए और बिस्तर साफ होना चाहिए।

2.सोते समय पांव उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

3.माता-पिता के चरण स्पर्श करने के बाद ही सोना चाहिए।

4.शयनकक्ष में कपूर जलाकर सोना चाहिए क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है।

5.शास्त्रों के अनुसार रात्रि के समय घर की दक्षिण या दक्षिण-पश्चिन दिशा में दीपक जलाने से पितरों का मार्ग प्रशस्त होता है।

6.यदि आप देवस्थान पर दीपक लगाते हैं इससे धन का आगमन होगा और निर्धनता दूर होगी।