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एनसीईआरटी की किताब पर विवाद, भाजपा को बताया ‘हिन्दुत्व एजेंडे’ वाली पार्टी

04 Jul 2018
किताब पर ‘राजनीति’!

JULY 04 (WTN) - मध्य प्रदेश में एनसीईआरटी की 12वीं की राजनीति शास्त्र की किताब पर चल रहा विवाद रूकने का नाम नहीं ले रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार इस किताब के बारे में केन्द्र सरकार को पत्र लिखने जा रही है। दरअसल 12वीं क्लास की एनसीईआरटी की किताब में भाजपा को ‘हिन्दुत्व एजेंडे’ वाली पार्टी बताया गया है। जानकारी के मुताबिक, फिलहाल यह किताब सीबीएसई से सम्बन्धित मध्य प्रदेश के निजी स्कूलों में चल रही है। जबकि सरकारी स्कूलों में अगले साल से यह किताब पढ़ाई जाएगी।

दरअसल एनसीईआरटी की 12वीं क्लास की राजनीति शास्त्र किताब में 'स्वतंत्र भारत में राजनीति’ अध्याय में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बारे में लिखा गया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इस किताब में लिखा है कि भाजपा ‘हिन्दुत्व एजेंडे’ वाली पार्टी है। किताब में यह भी लिखा गया है कि गोधरा में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा हुई जो कि करीब एक महीने तक चलती रही और इस हिंसा में 1100 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम थे। इतना ही नहीं, किताब में यह भी लिखा है कि इस गोधरा हिंसा के समय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और उन्होंने गुजरात सरकार को ‘राजधर्म’ निभाने की सीख दी थी।

भाजपा के साथ-साथ इस किताब में कांग्रेस का भी जिक्र किया है। किताब में लिखा गया है कि देश में लंबे समय तक ‘कांग्रेस के प्रभुत्व’ का दौर था, लेकिन ‘गुटबाजी’ कांग्रेस की कमजोरी नहीं ताकत बनी। किताब में यह भी लिखा है कि कांग्रेस आजादी के बाद हर चुनाव में आगे रही।
किताब में इस तरह की बातें सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा का आरोप है कि यह भाजपा को ‘बदनाम’ करने की साजिश है, और इस किताब को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल के समय लिखवाया गया है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी स्कूलों में अभी 12वीं में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम नहीं चल रहा है। जबकि अभी प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में इस कोर्स की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक जोशी के मुताबिक इस किताब पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को वे पत्र लिख रहे हैं। दीपक जोशी के मुताबिक, ये बातें या तो पढ़ाई ही नहीं जानी चाहिए या फिर सही तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।