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मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत ‘खराब’, ‘खतरे’ में कर्मचारियों का वेतन

07 Jul 2018
चुनावी साल में खजाना ‘खाली’, लेकिन घोषणाएं ‘जारी’...

JULY 07 (WTN) - यदि आप मध्य प्रदेश के मतदाता हैं तो आप पर 36 हजार रुपये का ‘कर्ज’ है। पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आखिर माजरा क्या है, दरअसल मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में ‘वित्तीय संकट’ शुरू हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को साफ कर दिया है कि ‘वित्तीय संकट’ की स्थिति है, और यदि कुछ नहीं किया गया तो कर्मचारियों को वेतन देने पर संकट आ सकता है। हालत यह हो गई है कि मध्य प्रदेश के वित्तीय हालत ‘ओवर ड्रॉफ्ट’ तक पहुंच गए हैं।

दरअसल माना जा रहा है कि चुनावी साल में ‘लोक लुभावन योजनाओं’ के कारण मध्य प्रदेश का ‘खजाना खाली’ होता जा रहा है। मार्च 2018 में पेश की गई कैग की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश पर 31 मार्च 2018 की स्थिति में 1.83 लाख करोड़ का कर्ज था। यानि इसके मुताबिक हर मतदाता पर औसतन 36,000 रुपए का कर्ज है। वहीं जानकारी के मुताबिक इस कर्ज के बदले में मध्य प्रदेश की सरकार 47,564 करोड़ का ब्याज अदा कर चुकी है।

इस पर वित्त मंत्री जयंत मलैया का कहना है, ”चुनावी साल में मुख्यमंत्री कुछ नया करते हैं जिसके कारण रकम ज्यादा निकल रही है, लेकिन अभी ओवर ड्रॉफ्ट नहीं है, हो सकता है कि आगे जाकर ओवर ड्रॉफ्ट हो जाए लेकिन इसकी हमें चिंता नहीं है।“ इस पर कांग्रेस का कहना है, “मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत हालात खराब है। विकास होता नहीं है और पैसा पता नहीं कहां जा रहा है, जिसके बाद ओवर ड्राफ्ट की तैयारी है।“

यदि मध्य प्रदेश की ‘वित्तीय हालत’ खराब है तो सरकार को चाहिए कि समझदारी से कदम उठाए और सोच समझकर योजनाओं की घोषणा करे। क्योंकि यदि ‘ओवर ड्रॉफ्ट’ की स्थिति बनती है, तो इससे सरकार की ‘वित्तीय अव्यवस्थाओं’ की पोल खुल जाएगी। इतना ही नहीं यदि मध्य प्रदेश पर कर्ज बढ़ता जाता है, तो इसे आम जनता को ‘टैक्स’ के रूप में चुकाना होगा।