मध्य प्रदेश में कांग्रेस-बसपा गठबंधन में सीटों पर पेंच
JULY 18 (WTN) – कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व ने तो स्वीकार कर लिया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में राज्य के नेता अपने दम पर भाजपा को पराजित करने की स्थिति में नहीं हैं। लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने में कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती है। राज्य में कांग्रेसी नेताओं की गुटबाजी से वाकिफ़ राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के लिए बसपा से गठबंधन करने का फ़ैसला लिया है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा को 230 में से करीब 26 सीटें देने के लिए राजी हो गई है। ग्वालियर-चम्बल, बुन्देलखण्ड और विन्ध्य क्षेत्र जहां पर कि बसपा का जनाधार है उन क्षेत्रों में कांग्रेस बसपा को सीटें दे सकती है।
सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय स्तर पर तो फैसला ले लिया गया है कि बसपा को 26 सीटें गठबंधन के तहत मिलेंगी। लेकिन मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेता बसपा को 16 के करीब सीटें देने के पक्ष में ही दिख रहे हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के मुताबिक यूपी से लगे जिन क्षेत्रों में बसपा का प्रभाव है वहां पर कांग्रेस को बसपा को सीटें देना चाहिए, लेकिन अजय सिंह का कहना है कि बसपा के साथ 14 से 16 सीटों का गठबंधन ही वाज़िब है।
अजय सिंह के मुताबिक, 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने मध्य प्रदेश में चार सीटों पर जीत हासिल की थी और 11 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। ऐसे में बसपा के साथ गठबंधन में 14 से 16 सीटों पर ही बातचीत की जानी चाहिए।
ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता या तो बसपा के साथ गठबंधन करने के मूड में नहीं हैं, और यदि गठबंधन के मूड में हैं तो उसे सिर्फ 14 से 16 सीटें देने के ही पक्ष हैं। वहीं दूसरी तरफ माना जा रहा है कि बसपा 20 से कम सीटों पर गठबंधन करने के लिए शायद तैयार ना हो। अब देखना होगा कि राहुल गांधी मध्य प्रदेश के नेताओं की बात मानकर बसपा को 14 से 16 सीटों के लिए मना पाते हैं कि नहीं।