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लोकसभा में ‘आंकड़ों का खेल’

19 Jul 2018
अविश्वास प्रस्ताव से पहले जानिए लोकसभा में 'दलीय स्थिति'

JULY 19 (WTN) – कल लोकसभा में मोदी सरकार के ख़िलाफ पहले 'अविश्वास प्रस्ताव' पर चर्चा होना है। भाजपा को 'विश्वास' है कि मोदी सरकार के ख़िलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा। लेकिन आप जानना चाहते होंगे कि आख़िर लोकसभा में किस पार्टी के पास कितने सांसद हैं? तो चलिए हम आपको बताते हैं कि इस समय लोकसभा में 'दलीय स्थिति' क्या है।

लोकसभा में कुल 'चुने हुए' सांसद की संख्या 543 होती है। इस समय दस सीटें खाली हैं, यानि कि लोकसभा अध्यक्ष मिलाकर कुल सांसदों की संख्या हुई 533। भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए '267' सांसदों की ज़रूरत है। इस समय लोकसभा स्पीकर मिलाकर भाजपा के सांसदों की संख्या 274 है। यानि कि भाजपा के पास ही बहुमत से 'सात सांसद' ज़्यादा हैं। 

वहीं बात करें भाजपा के सहयोगियों की तो शिवसेना के 18, रामविलास पासवान की पार्टी एलजेएसपी के 6, अकाली दल के 4, आरएलएसपी के 3, जेडीयू के 2, अपना दल के 2 और अन्य के 6 सांसद हैं। इस तरह भाजपा और उसके बड़े सहयोगी सांसदों की संख्या कुल मिलाकर 315 हो रही है। बाकि कुछ और छोटे दलों की संख्या मिला ली जाए तो साफ़ है कि भाजपा को अविश्वास प्रस्ताव से सरकार गिरने की कोई भी 'चिंता' करने की ज़रूरत नहीं है।

माना जा रहा है कि पार्टी से नाराज़ चल रहे शुत्रघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और सावित्री बाई फुले अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बागी रूख अख़्तियार करते भी हैं तो ख़ुद भाजपा के पास पर्याप्त सांसद हैं।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक सोनिया गांधी ने कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए उनके पास 'पर्याप्त नम्बर' हैं। ऐसे में जरा विपक्षी दलों के सांसदों की संख्या पर भी नज़र डाल ली जाए। 

कांग्रेस के पास 48 सांसद हैं तो अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली टीडीपी के पास 16, जेडीएस के पास 1, एनसीपी के पास 7, आरजेडी के पास 4, टीएमसी के पास 34, सीपीआईएम के पास 9, सपा के पास 7, आम आदमी पार्टी के पास 4, टीआरएस के पास 11, वाईएसआर कांग्रेस के पास 4, एआईयूडीएफ के पास 3 सांसद हैं। वहीं यदि कुछ और छोटी पार्टियों और निर्दलियों को भी मिला लिया जाए तो भी विपक्ष के पास इतने सांसद नहीं हैं कि मोदी सरकार को गिरा सकें।

वहीं भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी रखने वाली पार्टियों एआईएडीएमके के पास 37 और बीजेडी के पास 20 सांसद हैं। माना जाता है कि यह दोनों दल भाजपा के विपक्ष में वोट नहीं करेंगे और वोटिंग के दौरान अनुपस्थिति रहेंगे, यदि ऐसा होता है तो बहुमत का आंकड़ा और भी कम हो जाएगा जिससे भाजपा को कोई भी खतरा नहीं है।