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मध्य प्रदेश में ‘असमंजस’ में कांग्रेस

20 Jul 2018
क्या ‘अकेली’ चुनाव लड़ेगी कांग्रेस?
 
JULY 20 (WTN) – मध्य प्रदेश में कांग्रेस भाजपा को हराने के लिए हर ‘रणनीति’ पर विचार कर रही है। 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस बसपा और सपा के सम्पर्क में क्योंकि वो नहीं चाहेगी की भाजपा विरोधी वोटों का ‘धुव्रीकरण’ हो।

लेकिन अभी तक बसपा और सपा के साथ कांग्रेस के गठबंधन पर ‘सस्पेंस’ बना हुआ है। इन दोनों पार्टियों के साथ गठबंधन की चर्चाओं पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का ‘बड़ा बयान’ सामने आया है। कमलनाथ ने कहा कि यदि गठबंधन नहीं होता है तो कांग्रेस मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, और यदि गठबंधन होता है तो भी पार्टी 200 से ज्यादा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।

कमलनाथ के इस बयान के बाद भाजपा को कुछ ‘राहत’ मिली होगी। जैसा कि आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश में चुनाव के लिए कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे में बसपा और समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन को लेकर ‘असमंजस’ बना हुआ है।

इससे पहले छिंदवाड़ा में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना से ‘इनकार’ कर दिया था। एक सभा में प्रदीप अहिरवार ने कहा था कि अभी गठबंधन की कोई बात नहीं है। कांग्रेस यह प्रचार इसलिए कर रही है क्योंकि उसे पता है कि प्रदेश में इस बार बसपा की सरकार बन रही है।

वहीं समाजवादी पार्टी से कांग्रेस की गठबंधन की बात करें तो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया था कि सपा गठबंधन के लिए ‘ऑफर’ दे चुकी है। अब देखना होगा कि सपा के ऑफर को क्या कांग्रेस स्वीकार करती है या फिर अपने दम पर ही चुनाव लड़ेगी।

मध्य प्रदेश में सालों से कांग्रेस और भाजपा के बीच ही विधानसभा चुनाव में मुकाबला होता आया है। बसपा और सपा जैसी पार्टियां विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरती तो हैं, लेकिन कभी भी ये पार्टियां दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर पाईं हैं पर ये भाजपा विरोधी वोटों का धुव्रीकरण करने में कामयाब रहती हैं जो कि कांग्रेस के लिए हमेशा से ‘सिरदर्द’ रहा है।

कांग्रेस के सामने काफी ‘असमंजस’ की स्थिति है। क्योंकि यदि कांग्रेस बसपा और सपा से गठबंधन नहीं करती है तो भाजपा विरोधी वोटों का ‘धुव्रीकरण’ होगा जिसका ‘लाभ’ भाजपा को मिलेगा, लेकिन यदि कांग्रेस गठबंधन करती है तो उस पर भाजपा ‘निशाना’ साधेगी कि कांग्रेस में अकेले में ‘हिम्मत’ नहीं है कि वो भाजपा को हरा सके। खैर मध्य प्रदेश की राजनीति में देखिए कि आगे-आगे होता है क्या।