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इमरान ख़ान: पहले सेना के विरोधी, अब सेना के ख़ास

27 Jul 2018
सेना की ‘कठपुतली’ ना बन जाएं इमरान ख़ान

JULY 27 (WTN) – पाकिस्तान में हुए आम चुनावों पर सभी की ‘निगाहें’ लगी हुईं थीं। पाकिस्तान की दो बड़ी पार्टियों को पछाड़ते हुए इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ ने सभी को चौका दिया है। कभी पाकिस्तानी सेना पर ‘विवादित बयान’ देने वाले इमरान ख़ान, लगता है कि सेना के ‘चहेते’ बन गए हैं, या फिर कहें कि सेना के ‘पोस्टर ब्वॉय’ के रूप में उन्हें देखा जा रहा है। 

पाकिस्तान की राजनीति के जानकारों का मानना है कि इमरान ख़ान अब सेना के ‘लाडले’ बन गए हैं। कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान की मदद सेना ने ‘पर्दे के पीछे’ की है। लेकिन आश्चर्य इस बात है कि कभी सेना के बारे में विवादित बयान देने वाले इमरान ख़ान सेना के इतने ‘चहेते’ कैसे बन गए ? साल 2012 में दावोस में पीटीआई को दिए एक इन्टरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा था, “सेना के दिन लद गए हैं, अब आप पाकिस्तान में आप जल्द ही सच्चा लोकतंत्र देखेंगे।“ कभी सेना पर सवाल उठाने वाले इमरान ख़ान आजकल सेना के ‘ख़ास’ नज़र आ रहे हैं। 

2012 से 2018 के बीच इमरान ख़ान के सेना पर दिए बयानों में काफी बदलाव देखा गया है। इस साल मई में एक अमेरिकी अख़बार को दिए इन्टरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा था, “यह पाकिस्तान की सेना है, दुश्मन की सेना नहीं है। मैं सेना को अपने साथ लेकर चलूंगा।”

पाकिस्तान में अभी तक किसी भी प्रधानमंत्री ने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। पूरी दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान में लोकतंत्र है, लेकिन ‘अप्रत्यक्ष’ रूप से कमान सेना के हाथों में ही होती है। 1947 में पाकिस्तान की आज़ादी के बाद से अब तक लगभग आधे समय वहां पर सेना का ही शासन रहा है। 

पाकिस्तानी सेना के लिए ही नहीं, भारत के लिए भी इमरान ख़ान के रुख़ में ‘बदलाव’ देखने को मिल रहा है। 2012 में इमरान ख़ान पड़ोसी देश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते थे, लेकिन इस बार के चुनावों में उन्होंने प्रचार के दौरान भारत पर कई आरोप लगाए। इमरान ख़ान ने प्रचार के दौरान कई बार कहा कि भारत ने पाकिस्तानी सेना को कमज़ोर किया है। साथ ही ख़ान ने आरोप लगाया कि इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ से मिलकर भारत ने साज़िश रची।“

अब जबकि पाकिस्तान के आम चुनाव में इमरान ख़ान की पार्टी सबसे ज़्यादा सीटें जीत चुकी है, ऐसे में इमरान ख़ान के बयानों में फिर से बदलाव देखा गया है। चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले इमरान ख़ान ने कहा है, “पाकिस्तान, भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए तैयार है, और अगर भारत एक कदम आगे बढ़ाएगा तो वह दो कदम आगे बढ़ाएंगे।“

अब वापस अतीत में चलते हैं, तो साल 2013 में एक इन्टरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा था, ”सेनाएं भारत और पाकिस्तान के बीच की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती हैं। दुश्मनी भारत और पाकिस्तान के लोगों के हित में नहीं है। समाधान बातचीत से ही होगा।“

इमरान ख़ान के लगातार बदलते बयान बताते हैं कि इमरान ख़ान धीरे-धीरे पाकिस्तान की सेना की ज़ुबान बोलने लगे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि इमरान ख़ान की जीत में बहुत कुछ ‘हाथ’ सेना का भी है। पीपीपी और पीएमएल (एन) जैसी पार्टियां पहले ही चुनावों में धांधली का आरोप लगा चुकी हैं।

यदि इमरान ख़ान सेना के पोस्टर ब्वॉय के रूप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यही माना जा सकता है कि भारत के साथ सम्बन्ध सुधारने की बातें सिर्फ़ ‘मज़ाक’ है, क्योंकि पाकिस्तान की सेना कभी नहीं चाहती कि भारत के साथ सम्बन्ध सामान्य हों। पाकिस्तान में सेना का दख़ल सत्ता में हमेशा से ही रहा है। कई सरकारों का तख़्ता पलट पाकिस्तान की सेना कर चुकी है।

ऐसे में जबकि इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, कहा जा सकता है कि पाकिस्तान की सेना का एक ‘भरोसेमंद’ व्यक्ति प्रधानमंत्री बना है। यदि ऐसा है तो इमरान ख़ान सेना और आईएसआईए की बस ‘कठपुतली’ बनकर रह जाएंगे।