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भूलकर भी नहीं करें शिवपूजा में ‘इनका’ उपयोग!

05 Aug 2018
शिवपूजा में ‘वर्जित' है हल्दी और तुलसी

AUG 05 (WTN) – सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि देवाधिदेव महादेव बहुत शीघ्र ही भक्ति और पूजा से प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव को आदि और अनंत माना गया है, यानि वे हर कहीं व्याप्त हैं। शिवलिंग की पूजा का हिन्दू धर्म में अत्यन्त महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग की पूजा के लिए कुछ नियम हैं?

शिवलिंग पूजा या शिवपूजा में ऐसी बहुत सी सामग्री है जो उन्हें अर्पित करना वर्जित है। आप भी जानिए कि शिवपूजा में कौन सी साम्रगी को वर्जित कहा गया है।

हल्दी – हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में हल्दी का काफी महत्व है। लेकिन भगवान शिव की पूजा में हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। हल्दी का उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है, इसलिए नीलकण्ठ महादेव की पूजा में हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है।

फूल – मान्यता है कि देवाधिदेव भगवान शिव को कनेर, कमल, केतड़ी, केवड़े और लाल रंग के फूल नहीं चढ़ाए जाते हैं।

कुमकुम या रोली - धर्मशास्त्रों के अनुसार पार्वती पति महादेव को कुमकुम और रोली नहीं लगाई जाती है।

शंख – जैसा कि आप जानते हैं कि भगवन विष्णु को शंख बहुत ही प्रिय है। लेकिन भगवान शिव ने शंखचूर नामक असुर का वध किया था, इसलिए भगवान शिव की पूजा में शंख वर्जित माना गया है

नारियल पानी – कभी भी नारियल पानी से भगवान शिजव का अभिहषेक नहीं करना चाहि ए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नारियल को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिगए सभी शुभ कार्य में नारियल को प्रसाद के रुप में ग्रहण किया जाता है। लेकिोन देवाधिदेव महादेव को अर्पिवत होने के बाद नारियल पानी ग्रहण योग्य नहीं रह जाता है।

तुलसी दल – मान्यता है कि तुलसी के पत्ते भी भगवान शिंव को नहीं चढ़ाना चाहिवाए। एक कथा के अनुसार, असुर राजा जलंधर का भगवान शिव ने वध किया था जिासकी पत्नी वृंदा तुलसी का पौधा बन गई थी। इसलि‌ए वृंदा ने भगवान शि‌व की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग ना करने की बात कही थी।