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विश्लेषण: जानिए क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीज़ल के दाम

31 Aug 2018
गिरता रुपया सबसे बड़ा कारण है पेट्रोल-डीज़ल के महंगा होने का
 
AUG 31 (WTN) – हर दिन पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं, जिसके कारण आपकी जेब पर असर पड़ रहा है। लेकिन यदि आप सोच रहे हैं कि पेट्रोल-डीज़ल के दाम जल्द ही कम हो जाएंगे, तो आप ग़लत सोच रहे हैं। आने वाले दिनों में इन दोनों के दाम और भी बढ़ेंगे और आपको महंगाई का सामना करना पड़ेगा। आखिर क्यों पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ रहे हैं? आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। चूंकि कच्चा तेल यानि कि क्रूड ऑयल विदेश से आयात करना पड़ता है, इसलिए इसका भुगतना अमेरिकी डॉलर में होता है। जब-जब भी क्रूड ऑयल के दाम बढ़ते हैं या फिर डॉलर के मुकाबले भारतीय रूपया कमजोर होता है, देश में पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ने लगते हैं।
 
जानकारी के मुताबिक इसी सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल क़रीब चार डॉलर महंगा हो गया था, जिसका प्रभाव भारत में पड़ा और पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ गए। हालांकि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार जंग गहराने की आशंका से वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल के दामों में तेज़ी थम गई। लेकिन जानकारों का कहना है कि मांग और पूर्ति के बीच बड़े अंतर को देखते हुए फिलहाल पेट्रोल-डीज़ल सस्ता मिलना मुश्किल है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड में 80 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी लाइट क्रूड में 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक की तेज़ी देखने को मिल सकती है। इसके कारण पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। चूंकि रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर हालत में है तो पेट्रोल-डीज़ल और भी महंगा होगा।

तेल की क़ीमतों पर अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का भी काफी असर पड़ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने का फैसला लिया है। इधर अमेरिका में पिछले सप्ताह तेल के भण्डार में कमी आई है, तो वहीं ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध जारी हैं। इन सभी कारणों से इन दिनों तेल की कीमतों में तेजी आई है जो कि आने वाले दिनों में भी जारी रह सकती है।

जानकारों के मुताबिक, सर्दी के मौसम में अमेरिका में तेल की खपत बढ़ जाती है, जिसके कारण क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने की पूरी आशंका है। यदि क्रूड ऑयल और महंगा हुआ तो स्वाभाविक है कि भारत में पेट्रोल-डीज़ल भी महंगा होगा जिसका ख़ामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार 24 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका में कच्चे तेल का भण्डार 26 लाख बैरल घटकर 40.58 करोड़ बैरल रह गया। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी ऐतिहासिक गिरावट से तेल का आयात महंगा होता जा रहा है।  जिसके कारण भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में तेज़ी बनी रह सकती है।
 
स्वाभाविक है कि यदि क्रूड ऑयल महंगा होगा तो डीज़ल भी महंगा होगा, और यदि डीज़ल महंगा बिकेगा तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। क्योंकि डीज़ल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी जिससे खाने पीने की वस्तुओं से लेकर हर सामान महंगा हो जाएगा।
 
यदि रुपये में डॉलर के मुकाबले गिरावट जारी रही तो कहा जा सकता है कि तेल की कीमतें क्रूड ऑयल का आयात सुलभ होने के बाद भी कम नहीं होंगी। तुर्की संकट के कारण डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ही नहीं एशिया के कई देशों की करंसी में गिरावट दर्ज की जा रही है। माना जा रहा है कि जब तक तुर्की संकट का हल नहीं निकलता रुपया कमजोर होता जाएगा जिसका ख़ामियाजा आपको महंगे पेट्रोल-डीज़ल के रुप में भुगतना पड़ेगा।