कल होगी मध्य प्रदेश पुलिस की ‘असली परीक्षा’
SEP 05 (WTN) – कल यानि 6 सितम्बर को एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ प्रदेशव्यापी बंद से राज्य की पुलिस का टेंशन बढ़ गया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय को प्रदेश के 45 ज़िलों में बंद के प्रभावी असर की जानकारी मिली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस महाबंद को सपाक्स के साथ-साथ करीब 40 संगठनों ने समर्थन किया है।
जैसा कि आप जानते हैं कि केन्द्र सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किये गये संशोधन का पूरे मध्यप्रदेश में भारी विरोध हो रहा है। कल यानि कि 6 सितम्बर को सवर्ण समाज, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों की तरफ से बंद की घोषणा की गई है। प्रदेश के कई ज़िलों में बंद और रैली के लिए प्रशासन से बाकायदा अनुमति मांगी गई है।
सोशल मीडिया फेसबुक और व्हाट्सएप पर भी बंद के लिए प्रचार किया जा रहा है। इस बंद के कई राजनीतिक मायने भी हैं क्योंकि एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ एकजुट हुए लोगों ने अब नेताओं का विरोध करना शुरू कर दिया है। कई जगहों पर नेताओं को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश के ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, दतिया, उज्जैन, कटनी, सतना, जबलपुर, सीधी, रीवा, हरदा, विदिशा, सागर और टीकमगढ़ सहित 45 ज़िलों में सपाक्स ने सवर्णों के दूसरे संगठनों के साथ बैठक की है। संगठनों ने व्यापारी संगठनों से बंद के लिए समर्थन मांगा है। इधर सपाक्स की सक्रियता के कारण नेताओं में चिंता का मौहाल है।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन का इतना विरोध है रहा है कि कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और थावरचंद गहलोत जैसे नेताओं को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा है। कई सांसदों के खिलाफ भी लोगों ने गुस्सा दिखाया है जिसके बाद राजनेताओं में खलबली मची हुई है। कहा जा रहा है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन का विरोध नहीं करने वाले नेताओं से जनता काफी नाराज है।
इधर, यदि बंद के दौरान यदि स्थिति अनियंत्रित होती है तो पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद ज़िला और सम्भाग स्तर पर आईजी और एसपी परिस्थिति के हिसाब से कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। कहा जा रहा है कि ज़रूरत पड़ने पर इंटरनेट सेवा भी बंद की जा सकती है। इधर, ज़िला प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों के आधार पर धारा 144 लागू कर रहा है, तो वहीं पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी निरस्त कर दी गई हैं।
कल का बंद यदि शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया तो इससे पुलिस की राहत की सांस लेगी। कल के बंद से पुलिस की तैयारियों और जिम्मेदारियों की भी परीक्षा हो जाएगी। चुनाव से पहले कल का बंद पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। यदि 2 अप्रैल के बंद के तरह यदि कल हिंसा होती है तो इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठेंगे। क्योंकि जिस तरह से मुख्ममंत्री शिवराज सिंह चौहान के वाहन पर पत्थर फेंके गए हैं उससे पुलिस के इनपुट की कमजोरी सामने आई है। अब देखना होगा कि पुलिस कल के बंद को शांतिपूर्वक तरीके से सम्भाल पाती है कि नहीं।