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मध्य प्रदेश में एक साथ हो सकते हैं निकाय चुनाव, सीएम शिवराज को सौंपी गई रिपोर्ट

10 Sep 2018
राज्य निर्वाचन आयोग भी एक साथ निकाय चुनाव कराने के पक्ष में

SEP 10 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई बार कई मंचों कह चुके हैं कि देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव होना चाहिए। इसके लिए वो तमाम राजनीतिक दलों से गुहार भी लगा चुके हैं। लेकिन खुद चुनाव आयोग लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के सवाल पर साफ़ कह चुका है कि अभी यह व्यवहारिक नहीं है।
 
इधर, मध्य प्रदेश में इससे सम्बन्धित एक रिपोर्ट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सौंपी गई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर लोगों कि क्या राय है, और यह कितना व्यवहारिक है इससे सम्बन्धित रिपोर्ट सीएम शिवराज सिंह चौहान को सौंप दी गई है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इस रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का पक्ष लिया गया है। वहीं इस रिपोर्ट में प्रदेश में सभी निकाय चुनाव एक साथ कराने की पहल करने की सिफारिश की गई है। कहा जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग भी इसके पक्ष में है और सरकार को इस बारे में प्रस्ताव भी दे चुका है। सम्भावना जताई जा रही है कि अगले साल होने वाले निकाय चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, जनसम्पर्क मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा की अध्यक्षता में गठित समिति ने राजनीतिक दलों, गणमान्य नागरिकों समेत मौजूदा कानूनों का विधिवत अध्ययन करने के बाद इस रिपोर्ट को तैयार किया है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस भी निकाय चुनाव एक साथ कराने पर सहमत है। आम आदमी पार्टी ने इस पर कोई राय नहीं रखी है, तो बाकी दलों की मिश्रित प्रतिक्रिया रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी समिति को अपने सुझाव दिए थे।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य निर्वाचन आयोग पहले से ही निकाय चुनाव एक साथ कराने के पक्ष में रहा है। राज्य चुनाव आयुक्त आर.परशुराम इसको लेकर राज्य सरकार के सामने प्रस्तुतिकरण भी दे चुके हैं। लेकिन एक साथ निकाय चुनाव कराना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए राज्य स्तर पर कुछ कानूनों में संशोधन करना होगा तो कुछ नियमों को बदलना होगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगले साल 2019 में निकायों के चुनाव होंगे। एक साथ चुनाव कराने के मामले में समिति का मानना है कि केंद्र स्तर पर भले ही प्रक्रिया में समय लगे, पर राज्य स्तर पर पहल की जा सकती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को एक साथ चुनाव कराने को लेकर 2016 में 11 पेज की रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा गया था कि 91 निकाय ऐसे हैं, जहां चुनाव विभिन्न कारणों से सामान्य चुनावों के साथ नहीं हो रहे हैं। यही स्थिति पंचायतराज संस्थाओं की भी है।
 
अब देखना होगा कि आख़िर क्या फ़ैसला राज्य की भाजपा सरकार लेती है। क्योंकि यदि प्रदेश में एक साथ निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होते हैं, तो पूरे देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत होगा। वहीं यदि ये चुनाव एक साथ होते हैं तो ख़र्चा भी कम होगा साथ ही बार-बार चुनाव के कारण लगने वाली आचार संहिता के कारण सरकारी काम भी प्रभावित नहीं होंगे।