एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद सवर्णों की नाराज़गी से डरी भाजपा और कांग्रेस, मनाने की कवायद
SEP 11 (WTN) – एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद जिस तरह से सवर्ण समाज का विरोध सामना आ रहा है, उससे राजनीतिक पार्टियों में चिंता की लहर है। धीरे-धीरे सवर्ण समाज का विरोध अब आंदोलन में बदल रहा है। सवर्ण समाज का साथ पिछड़ा वर्ग भी दे रहा है, ऐसे में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अब सवर्ण समाज को मनाने के लिए कवायद शुरू कर दी है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज़ लोगों को मनाने के लिए भाजपा ने बाकायदा एक प्लान बनाया है। भाजपा ने तय किया है कि सवर्णों से चर्चा कर उनकी नाराज़गी दूर की जाएगी। क्योंकि माना जा रहा है कि यदि भाजपा ने समय रहते ऐसा नहीं किया तो मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में चौथी बार जीत उसे नसीब नहीं होगी।
सवर्ण समाज की नाराज़गी एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के साथ इस बात से भी है कि भाजपा और कांग्रेस के किसी भी नेता ने उनके समर्थन में कोई भी बयान नहीं दिया, जबकि पूरे प्रदेश में सवर्ण समाज के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक इसके विरोध में हैं। 6 सितम्बर को बंद के दौरान भी जब भाजपा और कांग्रेस ने समर्थन नहीं दिया तो इससे सवर्ण समाज दोनों ही पार्टियों से ख़ासा नाराज़ है।
चुनावी साल में कांग्रेस ने सवर्णों की नाराज़गी को देखते हुए पहला कदम आगे बढ़ाया है। अपने एक बयान में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा, “हम सवर्णों को मनाएंगे, हम चाहते हैं कि सबके साथ न्याय हो। कांग्रेस किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी।“ इतना ही नहीं कमलनाथ ने यह भी कहा कि जहां भी इस एक्ट का दुरुपयोग हुआ है उसका कांग्रेस विरोध करती है।
कांग्रेस के बाद अब भाजपा भी सवर्णों के वोटबैंक की क़ीमत जानकर उन्हें नाराज़ करने का ख़तरा मोल नहीं ले सकती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में भोपाल में होने वाली बैठक में संगठन महामंत्री समेत कई बड़े नेता मध्य प्रदेश में हुए सवर्ण आंदोलन की समीक्षा करेंगे। वहीं एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध को लेकर पार्टी पदाधिकारी अपना फीडबैक भी देंगे।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद जिस तरह से सवर्ण समाज और पिछड़ा वर्ग गुस्से में है और विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को वोट ना देकर नोटा का बटन दबाने का समर्थन कर रहा है, उसने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं उनका दांव उलटा तो नहीं पड़ गया है।