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क्या आप जानते हैं जूडो और कराटे के बीच अंतर ?

18 Sep 2018
जूडो है रक्षात्मक तो कराटे है आक्रामक
 
SEP 18 (WTN) – आपने जूडो कराटे के बारे में सुना तो होगा ही । लेकिन क्या आप इन दोनों के बीच के अंतर को जानते हैं, यदि नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि जूडो और कराटे के बीच क्या अंतर होता है।
 
जूडो और कराटे दोनों मूलत जापान के मार्शल आर्ट्स हैं। एक तरह ये यह दोनों युद्धक खेल हैं। जूडो और कराटे में बिना हथियार के अपनी रक्षा और आक्रमण करना सिखाया जाता है साथ ही सशस्त्र विरोधियों के खिलाफ खुद का बचाव करना भी बताया जाता है।
 
जूडो एक आधुनिक लड़ाकू खेल है। साल 1882 में जिगोरो कानो ने इसे मार्शल आर्ट के रूप में विकसित किया। कानो ने प्राचीन जापानी मार्शल आर्ट जुजुत्सु में कुछ सुधार करते हुए जूडो को दुनिया के सामने  प्रस्तुत किया। जुजुत्सु मार्शल आर्ट में समुराई योद्धाओं को सशस्त्र विरोधियों पर काबू पाने का तरीका सिखाया जाता था। 
 
जूडो में हाथों और पैरों का प्रयोग किया जाता है। इसमें विरोधी को मारने की बजाय उससे प्रतिस्पर्धा करने पर जोर दिया जाता है और उसे पराजित कर फेंकने पर अधिक ध्यान दिया जाता है। एक तरह से जूडो को नरम और रक्षात्मक मार्शल आर्ट कहा जा सकता है। जूडो बहुत कुछ कुश्ती की तरह है, इसमें प्रतिद्वंदी से खुद का बचाव करना और उसे खुद से दूर कर फेंकना शामिल होता है।
 
कराटे भी जापानी मूल का एक मार्शल आर्ट है। कराटे में भी हाथों और पैरों को उपयोग किया जाता है। लेकिन यह जूडो से इसलिए अलग है क्योंकि इसमें विरोधी को गम्भीर चोट पहुंचाई जा सकती है और उसकी जान भी ली जा सकती है।
 
कराटे में विरोधी को पराजित करने के लिए घुटने और कोहनी का काफ़ी प्रयोग किया जाता है। इस तरह से कराटे को एक कठिन और आक्रामक मार्शल आर्ट कहा जा सकता है। कराटे को मुक्केबाज़ी के क़रीब कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें प्रतिद्वंदी को आक्रामकता के साथ घायल करना होता है।