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क्या पार्टी कार्यकर्ता में ही खत्म हो रहा है राहुल गांधी का करिश्मा?

17 Sep 2018
मध्य प्रदेश कांग्रेस में जारी है ‘गुटबाजी’, राहुल गांधी से मिलने में ही कार्यकर्ताओं को नहीं है दिलचल्पी!

SEP 17 (WTN) – मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता इस बार पूरी कोशिश में है कि पार्टी की ‘गुटबाजी’ को दूर करके कार्यकर्ताओं को ‘एकसाथ’ लाया जाए, जिससे कि भाजपा को शिकस्त दी जा सके। लेकिन जब पार्टी के प्रदेशस्तर के बड़े नेताओं में ‘गुटबाजी’ सामने आए और जब कांग्रेस कार्यकर्ता ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने में दिलचस्पी ना दिखाएं, तो समझ जाना चाहिए कि पार्टी की क्या ‘हालत’ है।
 
सबसे पहले बात करते हैं मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी की। मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। कहा जाता है कि पार्टी में गुटबाजी के कारण है 15 सालों से उसे जीत नसीब नहीं हो पा रही है। आज जबकि राहुल गांधी भोपाल दौरे पर हैं, ऐसे में भी पार्टी की गुटबाजी ‘खुलकर’ सामने आई है। जीहां जिस भेल दशहरा मैदान में राहुल गांधी की सभा है, वहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कटआउट ही ‘गायब’ है।
 
दशहरा मैदान में राहुल गांधी से लेकर प्रदेश स्तर के कई कांग्रेस नेताओं के 25 से 26 फीट ऊंचे कटआउट लगे हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह का कटआउट ही ‘गायब’ है। मध्य प्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच ‘मनमुटाव’ जगजाहिर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हैं, ऐसे में दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता का कटआउट नहीं लगना ज्योतिरादित्य सिंधिया की ‘रणनीति’ पर सवालिया निशान उठाता है।
 
सभास्थल पर दिग्विजय सिंह का कटआउट नहीं लगने से उनके समर्थक ‘नाराज़’ बताए जाते हैं। कभी प्रदेश के 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह का कटआउट ही यदि भोपाल में कांग्रेस के सभास्थल से गायब है, तो समझ लेना चाहिए कि कांग्रेस में गुटबाजी किस तरह से ‘हावी’ है।
 
यह तो रही बड़े कद्दावर नेताओं की बात। बात करें आम कांग्रेस कार्यकर्ता की, तो वो भी चुनाव के लिए उतना ‘उत्साहित’ नज़र नहीं आ रहा है जितना कि आना चाहिए। हद तो तब हो गई जब कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का ‘ऑफर’ दिया, लेकिन इसके बाद भी कार्यकर्ताओं में राहुल गांधी से मिलने के कोई भी ‘क्रेज नज़र नहीं’ आया।

कांग्रेस शक्ति ऐप के ज़रिये कार्यकर्ताओं को जोड़ने का प्रयास कर रही है। कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाने के लिए उन्हें कहा गया था कि जो कार्यकर्ता सबसे ज़्यादा रजिस्ट्रशन करवाएगा, उसे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से ‘सीधे मिलने’ का मौका मिलेगा।
 
लेकिन लगता है कि कांग्रेस कार्यकर्ता में राहुल गांधी से मिलने का कुछ क्रेज ही ‘नहीं’ है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, शक्ति ऐप में प्रदेश की कई विधानसभाओं में नाम मात्र के रजिस्ट्रेशन ही हुए हैं। जो दिखाते हैं कि कांग्रेस कार्यकर्ता अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने के लिए कितने ‘दिलचस्प’ हैं।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, 230 विधानसभाओं में से 12 विधानसभाओं में तो 30 से कम रजिस्ट्रेशन हुए हैं। वहीं 30 विधानसभा ऐसे हैं जहां 50 रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुए हैं।  बैतूल में सबसे ज़्यादा 4634 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, तो कमलनाथ के क्षेत्र छिंदवाड़ा में सिर्फ़ 287 लोग ही शक्ति ऐप के ज़रिये जुड़े हैं। इतना ही नहीं, भोपाल जैसे बड़े शहर में जहां कि पढ़े लिखे जागरुक कार्यकर्ता हैं वहां की सभी विधानसभाओं को मिलाकर ‘सिर्फ़’ 3214 रजिस्ट्रेशन ही हुए हैं।
 
कांग्रेस के बड़े नेताओं की ‘गुटबाजी’ और कार्यकर्ताओं में ‘निराशा’ बताती है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव को ‘सीरियसली’ नहीं ले रही है। 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस में यदि ‘गुटबाज़ी’ और ‘लापरवाही’ हावी रही तो भाजपा को लगातार चौथी बार जीतने से रोकना कांग्रेस के बस में नहीं है। अब जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने का क्रेज ही जब कार्यकर्ताओं में ‘ना’ हो, फिर क्या कहा जाए!