मध्य प्रदेश में भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं, सपाक्स ने बनाया राजनीतिक दल
OCT 02 (WTN) – केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटते हुए जिस तरह से एससी-एसटी एक्ट में संशोधन किया था उसके बाद से सवर्ण समाज और ओबीसी वर्ग नाराज़ चल रहा है। वैसे तो पूरे देश में इसका विरोध हुआ, लेकिन मध्य प्रदेश में सपाक्स के बैनर तले एससी-एसटी एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण के ख़िलाफ़ मुख़ालिफ़त कुछ ज़्यादा ही हुई। केन्द्र और राज्य सरकार की नीतियों से नाराज़ सवर्ण, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के सरकारी कर्मचारियों के संगठन सपाक्स ने अब चुनाव लड़ने का फ़ैसला भी कर लिया है।
मध्य प्रदेश में कर्मचारियों की हितों की लड़ाई लड़ने वाला सपाक्स अब राजनीतिक पार्टी बन गया है और आने वाले विधानसभा चुनाव में यह अपने प्रत्याक्षी भी खड़े करेगा। भोपाल में बाक़ायदा पार्टी के गठन का एलान भी कर दिया गया है। संगठन के संरक्षक रहे हीरालाल त्रिवेदी अब पार्टी के अध्यक्ष होंगे।
आज यानि दो अक्टूबर को सपाक्स पार्टी अस्तित्व में आ गई है। हीरालाल त्रिवेदी इसके अध्यक्ष बनाए गये हैं, वहीं सपाक्स ने प्रदेश कार्यकारिणी भी बनाई है जिसमें चार उपाध्यक्ष बनाए गये हैं। सपाक्स पार्टी के मुताबिक़ वे विधानसभा चुनाव में सभी 230 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और प्रमोशन में आरक्षण का विरोध इनका मुख्य चुनावी मुद्दा होगा। चुनाव आयोग की मंज़ूरी मिलने के बाद पार्टी का चुनाव चिन्ह तय होगा।
सपाक्स द्वारा नई पार्टी के गठन से यदि सबसे ज़्यादा नुकसान होगा तो वह होगा भाजपा को। क्योंकि सवर्ण समाज और ओबीसी हमेशा से ही भाजपा के परम्परागत वोट बैंक रहे हैं, लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन कर अपने इस परम्परागत वोट बैंक को नाराज़ कर दिया है। अब यदि सपाक्स चुनाव लड़ती है तो इसका पूरा ख़ामियाज़ा भाजपा को भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।