HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

मायावती के बाद अखिलेश यादव ने दिया कांग्रेस को मध्य प्रदेश में जोर का ‘झटका’

06 Oct 2018
समाजवादी पार्टी नहीं करेगी मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ विधानसभा चुनाव में गठबंधन

OCT 06 (WTN) – मायावती के बाद अब अखिलेश यादव ने कांग्रेस को मध्य प्रदेश में एक बड़ा झटका दिया है। विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगी कांग्रेस के लिए समाजवादी पार्टी से एक बुरी ख़बर आई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज ऐलान किया कि उनकी पार्टी मध्य प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी बल्कि वो बहुजन समाज पार्टी और गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।
 
कांग्रेस पर तंज़ कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “कांग्रेस ने बहुत ज़्यादा इंतज़ार कराया है और अब वो इंतज़ार नहीं कर सकते। राजनीति में कोई किसी का इंतज़ार नहीं करता है। हम कब तक उनका (कांग्रेस) इंतज़ार करते।” वहीं अखिलेश यादव ने संकेत दिये कि छत्तीसगढ़ में भी समाजवादी पार्टी, बसपा और गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी से बात करेगी। हालांकि, अखिलेश यादव ने इस बारे में कुछ नहीं बोला कि लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी कांग्रेस से गठबंधन करेगी या नहीं।
 
बसपा के बाद अब समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक बड़ा झटका दिया है। मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस को इस बार आशा थी कि बसपा और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन करके वो भाजपा विरोधी वोटों का धुव्रीकरण होने से रोक सकेगी और इसका फ़ायदा उसे मिलेगा। लेकिन मायावती के बाद अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इनकार करके कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। यदि कांग्रेस का बसपा और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन होता तो भाजपा विरोधी वोट एकसाथ रह सकते थे।
 
2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, बसपा और समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में बसपा को 6.29 प्रतिशत मत मिले थे और वो चार सीटें जीतने में सफल रही थी, वहीं समाजवादी पार्टी को 0.03 प्रतिशत वोट मिले थे और उसका खाता भी नहीं खुल सका था, तो वहीं गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी को क़रीब एक प्रतिशत वोट मिले थे और उसे भी एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हो सकी थी। वहीं भाजपा को 44.87 प्रतिशत मत मिले थे और उसने 165 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2013 के चुनाव में कांग्रेस को 36.38 प्रतिशत वोट मिले थे और वो 58 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। अब यदि इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, बसपा, समाजवादी पार्टी और गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी मिलकर चुनाव लड़ते तो भाजपा विरोधी वोटों का धुव्रीकरण रुकता और भाजपा विरोधी वोट एक साथ रहते जिससे यह गठबंधन भाजपा को बराबरी की टक्कर दे सकता था।

कांग्रेस का बसपा और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन ना होना भाजपा खेमे के लिए राहत की ख़बर है। तीनों पार्टियां जब अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी तो इसका पूरा फ़ायदा भाजपा को ही होगा और उसके विरोधी वोट बंट जाएंगे। खैर अभी चुनाव होने में समय है, हो सकता है कि ऐन वक़्त पर बसपा और समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लें, लेकिन इसकी सम्भावना कम ही नज़र आती है। खैर फिलहाल तो भाजपा के लिए राहत की ख़बर है।