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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव: वोट काटने और सीटें जीतने में सफल रहे हैं निर्दलीय प्रत्याशी

17 Oct 2018
कई सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के लिए ख़तरा साबित हो सकते हैं निर्दलीय प्रत्याशी

OCT 17 (WTN) – मध्य प्रदेश में पिछले 5 विधानसभा चुनावों पर नज़र डाले तो मुख्य मुक़ाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहा है। 1993 और 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी तो लगातार तीन बार 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने कांग्रेस को शिकस्त देकर सरकार बनाई। भाजपा और कांग्रेस के अलावा बसपा, सपा और भारतीय जनशक्ति पार्टी ही कुछ सीटें जीतने में कामयाब रहीं हैं।
 
बात करें निर्दलीय प्रत्याशियों की तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हर बार काफ़ी तादात में निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ते हैं जिनमें से ज़्यादातर की तो जमानत ही जब्त हो जाती है। लेकिन ये निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के वोट काटने में काफ़ी सफल रहते हैं, काफ़ी सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों के कारण ही भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है। इतना ही नहीं, कई सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को शिकस्त भी दी है। आइये आपको बताते हैं कि पिछले पांच विधानसभा चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन कैसा रहा है।
 
1993 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 320 सीटों पर कुल 1814 निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। जिसमें से 1786 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। इन निर्दलीय प्रत्याशियों को कुल 5.88 प्रतिशत वोट मिले थे और ये 8 सीटों पर जीत हासिल करने में भी सफल रहे थे।
 
बात करें 1998 के विधानसभा चुनाव की तो इस चुनाव में प्रदेश की 320 सीटों पर कुल 892 निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था जिसमें से 859 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। 1998 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को कुल 6.49 प्रतिशत वोट मिले थे और ये 9 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे।
 
2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस विरोध के कारण निर्दलीय प्रत्याशियों को वोट तो काफ़ी मिले लेकिन वे ज़्यादा सीटों पर जीत हासिल नहीं कर सके। 2003 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 230 सीटों पर कुल 879 निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था जिसमें से 869 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को 7.70 प्रतिशत वोट तो मिले लेकिन वे सिर्फ़ 2 सीटों पर ही जीत हासिल कर सके।
 
2008 के विधानसभा चुनाव में भी निर्दलीय प्रत्याशियों को काफ़ी ज़्यादा वोट मिले। इस चुनाव में कुल 1398 निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा और 8.23 प्रतिशत मत हासिल करने में ये कामयाब भी रहे, लेकिन इसमें से 1384 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई और जीत सिर्फ़ 3 निर्दलीय प्रत्याशियों को ही हासिल हो सकी।
 
पिछले विधानसभा चुनाव यानि कि साल 2013 में कुल 1090 निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार 1076 निर्दलीय प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को कुल 5.38 प्रतिशत वोट मिले थे और सिर्फ़ 3 सीटों पर ही निर्दलीय जीत हासिल कर सके थे।