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क्या फ़िर से शीत युद्ध के मुहाने पर खड़ी है दुनिया?

22 Oct 2018
ईरान के बाद अब रूस के साथ अमेरिका परमाणु संधि से हुआ अलग, बढ़ेगी हथियारों की दौड़

OCT 22 (WTN) – सालों तक शीत युद्ध में एक दूसरे के ख़िलाफ़ मिसाइलें ताने खड़े करे अमेरिका और रूस के बीच एक बार फ़िर से शीतयुद्ध के आसार दिखाई दे रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ़ कर दिया है कि उनका देश मध्यम दूरी परमाणु शक्ति (आईएनएफ) संधि से अलग हो जाएगा जिस पर उसने शीत युद्ध के दौरान रूस के साथ हस्ताक्षर किए थे। यदि ऐसा होता है तो एक बार फ़िर से दुनिया पर तनाव के बादल छाने वाले हैं।
 
रूस पर गम्भीर आरोप लगाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है, “रूस ने समझौते का ‘उल्लंघन’ किया है और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन चाहते हैं कि अमेरिका तीन दशक पुरानी संधि से अलग हो जाए। वे कई सालों से इसका उल्लंघन कर रहे हैं। हम उन्हें परमाणु समझौते का उल्लंघन करने और हथियार बनाने नहीं दे रहे और हमें भी ऐसा करने की अनुमति नहीं है।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, “जब तक रूस और चीन एक नए समझौते पर सहमत ना हो जाएं तब तक हम समझौते को खत्म कर रहे हैं और फिर हथियार बनाने जा रहे हैं।”
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1987 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और उनके तत्कालीन यूएसएसआर समकक्ष मिखाइल गोर्बाचेव ने मध्यम दूरी और छोटी दूरी की मिसाइलों का निर्माण नहीं करने के लिए आईएनएफ संधि पर हस्ताक्षर किए थे। वैसे मध्यम दूरी परमाणु शक्ति (आईएनएफ) संधि की समयसीमा अगले दो साल में खत्म होने वाली है। साल 1987 में हुई यह संधि अमेरिका और यूरोप और सुदूर पूर्व में उसके सहयोगियों की सुरक्षा में मदद करती है। यह संधि अमेरिका और रूस को 300 से 3,400 मील दूर तक मार करने वाली जमीन से छोड़े जाने वाली क्रूज मिसाइल के निर्माण को प्रतिबंधित करती है।
 
रूस और चीन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जब तक रूस और चीन हमारे पास नहीं आते और कहते कि चलिए हमारे में से कोई उन हथियारों को न बनाए, तब तक हमें उन हथियारों को बनाना होगा, लेकिन अगर रूस और चीन यह कर रहे हैं और हम समझौते का पालन कर रहे हैं तो यह अस्वीकार्य है।” यानि की ट्रम्प ने साफ़ कर दिया है कि जब तक दूसरे देश इसका उल्लंघन करते रहेंगे तब तक अमेरिका इस समझौते का पालन नहीं करेगा और वो भी अब हथियार बना सकता है।
 
रूस पर आरोप लगाने के साथ-साथ डोनाल्ड ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर निशाना साधा और कहा कि इस पूरे मामले पर बराक ओबामा ने चुप्पी साधे रखी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि क्यों राष्ट्रपति ओबामा ओबामा ने बातचीत करने या बाहर निकलने की कोशिश नहीं की।“
 
इधर, रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आगाह किया है कि शीत युद्ध के समय के परमाणु हथियार समझौते से हटने की उनकी योजना काफ़ी ख़तरनाक है। इस बारे में रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रेयाबकोव का कहना है, “इस संधि से हटना खतरनाक कदम होगा। सैन्य इलाके में पूरी तरह से अपने अधिकार की कोशिशों के लिए वॉशिंगटन को अंतरराष्ट्रीय निंदा का सामना करना पड़ रहा है।”
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी इसी साल मई के महीने में अमेरिका ने ईरान के साथ महत्वपूर्ण परमाणु संधि से खुद को अलग कर लिया था और पर तरह-तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, वहीं अब रूस के साथ परमाणु संधि से अलग होने के बाद कहा जा रहा है कि दुनिया एक बार फ़िर से शीत युद्ध की क़गार पर है। चीन काफ़ी समय से अमेरिका के अधिनायकवाद को विरोध करता रहा है तो रूस और अमेरिका के बीच वर्चस्व की लड़ाई से सभी वाकिफ हैं।
 
कहा जा सकता है कि अमेरिका अब फ़िर से छोट से मध्यम दूरी की मिसाइलें बनाएगा और चूंकि उसका आरोप है कि रूस ऐसा पहले से ही कर रहा है तो स्वाभाविक है दोनों देशों के बीच हथियारों की होड़ बढ़ेगी, जिसके कारण दुनिया के बाकी बचे देशों के बीच में तनाव बढ़ेगा, ऐसा इसलिए क्योंकि बाक़ी बचे देशों को मज़बूरी में अमेरिका या रूस की तरफ़ होना पड़ेगा जैसा कि सालों पहले शीतयुद्ध के समय हुआ था। यदि ऐसा होता है तो फ़िर से दुनिया में अमेरिका और रूस के कारण तनाव बढ़ेगा।