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कमलनाथ की कांग्रेस नेताओं को ‘नसीहत’

16 Nov 2018
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले कांग्रेस नेताओं को कमलनाथ की ‘सीख’

NOV 16 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच घमासान मचा हुआ है। दोनों ही पार्टियों की तरफ़ से एक दूसरे के ख़िलाफ़ आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। लगातार 15 सालों से मध्य प्रदेश की सत्ता से दूर कांग्रेस के लिए इस बार के विधानसभा चुनाव करो या मरो की स्थिति से कम नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस के नेताओं को सम्भलकर बयानबाजी करने की जरूरत है ताकि इसका फायदा भाजपा ना उठा ले, लेकिन इसके उलटे कांग्रेस के बड़े नेता ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जिससे कांग्रेस को ही चुनाव से पहले सफाई देना पड़ रही है।

बात करें मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की, तो अपने दिये बयानों के बाद से ही वे विवादों और चर्चाओं में हैं। कुछ दिनों पहले कमलनाथ का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे कह रहे थे कि चुनाव तक मुस्लिमों को धैर्य रखना होगा उसके बाद हम यानि कि कांग्रेस यदि सत्ता में आए तो आरएसएस से निपट लेंगे। वहीं एक वीडियो में कमलनाथ कहते दिखे कि हमें तो बस जिताऊ प्रत्याशी चाहिए भले ही उनपर कितने केस हों।
 
कांग्रेस को तब और सफाई देने पड़ी जब उसके घोषणा पत्र में जिक्र था कि कांग्रेस की सरकार बनते ही सरकारी परिसरों में लग रही संघ की शाखाओं पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के संघ के शाखाओं में जाने पर रोक लगाई जाएगी। कांग्रेस के घोषणा पत्र में इस वचन के बाद काफ़ी बवाल मचा और कांग्रेस नेताओं खासकर कमलनाथ को अपना और अपन पार्टी का रुख साफ़ करना पड़ा।
 
संघ की शाखाओं पर बैन लगाने के मामले में हुई किरकिरी के बाद कमलनाथ को लगने लगा है कि अब इस मामले में डैमेज कंट्रोल की जरूरत है और इसके लिए वे प्रयास भी कर रहे हैं। इस बीच कमलनाथ की एक चिट्ठी वायरल हुई है जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं को संघ, राष्ट्रीय मुद्दों और अन्य कई मुद्दों पर बोलने से पहले अच्छी खासी नसीहत दी है।
 
कमलनाथ ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, “कांग्रेस नेता धार्मिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर टिप्पणी ना करें साथ ही न्यायालय में लम्बित मामलों पर कुछ भी कहने से बचें।” इसके अलावा कमलनाथ ने चिट्ठी में लिखा है, “कांग्रेस के नेता को प्रतिद्वंदी नेताओं पर अनर्गल, असंसदीय और अपमानजनक टिप्पणी नहीं करना है साथ ही  बिना किसी प्रमाण के प्रतिद्वंदी नेता पर आरोप नहीं लगाना है।”
 
लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में लगातार हार से तिलमिलाई कांग्रेस के कई नेताओं ने समय-समय पर संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी की थी जिसका काफ़ी विरोध हुआ था। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कोई भी नेता ऐसी टिप्पणी करने से बचे इसलिए कमलनाथ ने अपनी चिट्ठी में साफ लिखा है, “कांग्रेस भारतीय संविधान, सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करती है और मुझे आशा है कि कांग्रेस कार्यकर्ता इन निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेंगे।”
 
लगता है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को समझ आ गया है कि उनके नेताओं के बयानों के कारण ही कांग्रेस पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। खुद कमलनाथ के कुछ वीडियो ऐसे सामने आएं हैं जिससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि उनके खुद के बयानों के कारण कांग्रेस को सफ़ाई देते नहीं बन रही है। ऐसे में कहा जा सकता है कि कांग्रेस अब फूंक फूंककर आगे बढ़ने की राह पर है।
 
पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले मणिशंकर अय्यर के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दिए एक बयान के बाद गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की काफ़ी फ़जीहत हुई थी। अब देखना होगा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अपने नेताओं को काबू में रख पाती है कि नहीं। अब यदि चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह, मणिशंकर अय्यर और शशि थरूर जैसे नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी या फ़िर आरएसएस के ख़िलाफ़ कई अमर्यादित टिप्पणी कर दी तो मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत कांग्रेस के लिए बस सपना रह जाएगी।