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विश्लेषण: क्या चुनाव में भाजपा को फायदा दिलाएगी दिग्विजय सिंह से भीमा कोरेगांव मामले में पुलिस की पूछताछ?

19 Nov 2018
दिग्विजय सिंह पर नक्सली कनेक्शन का लगा गम्भीर आरोप, हो सकती है पूछताछ
 
NOV 19 (WTN) – मध्य प्रदेश के दस सालों तक मुख्यमंत्री रहे और कद्दावर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। कभी मुम्बई हमलों पर तो कभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर, कभी हिन्दुत्व पर तो कभी अयोध्या मामले पर दिग्विजय सिंह के बयानों विवादों में और चर्चा में रहे हैं। लेकिन अब एक नये विवाद में दिग्विजय सिंह फंसते जा रहे हैं। क्या है यह पूरा मामला आइये जानते हैं विस्तार से।
 
दरअसल भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे पुलिस दिग्विजय सिंह से पूछताछ कर सकती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ पुणे पुलिस ने माना है कि माओवादी समर्थक नेताओं के मोबाइल नम्बरों की जांच के दौरान एक नम्बर मिला था। जांच के बाद पुलिस का कहना है कि यह नम्बर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का है।  यदि ऐसा हो तो दिग्विजय सिंह एक बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं।
 
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार पुणे पुलिस के डीसीपी सुहास बावचे ने इस मामले में कहा है, “यह जांच बहुत संवेदनशील और कई हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ी है। हम इस मामले में सभी ऐंगल से पड़ताल कर रहे हैं। अगर ज़रूरत पड़ी तो हम दिग्विजय सिंह को जांच में जुड़ने के लिए समन भी जारी कर सकते हैं।”
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भाजपा प्रवक्ता सम्बित पात्रा ने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेताओं के ऊपर नक्सल लिंक के आरोप लगाए थे। सम्बित पात्रा ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह के कथित तौर पर नक्सली कनेक्शन हैं।
 
उधर भाजपा के आरोप पर पलटवार करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा था, “अगर ऐसा है तो मुझे सरकार गिरफ्तार करे। पहले देशद्रोही, अब नक्सली। अगर ऐसा है तो यहीं से गिरफ्तार करिए मुझे।”
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ यह पत्र 25 सितम्बर, 2017 का है। इस पत्र के मुताबिक़, कोम प्रकाश नाम के व्यक्ति ने कथित रूप से कोम सुरेंद्र को बताया कि कांग्रेस नेता छात्रों का इस्तेमाल करके देशभर में विरोध प्रदर्शन कराने के उनके प्रयासों में सहयोग करने के बहुत इच्छुक हैं। पत्र में कथित तौर पर एक मोबाइल नम्बर का जिक्र है जिस पर कोम सुरेंद्र इस मामले में सम्पर्क कर सकते हैं और आरोप है कि यह नम्बर कथित तौर पर दिग्विजय सिंह का है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार पुणे पुलिस के अनुसार कोम सुरेंद्र का मतलब सुरेंद्र गाडलिंग है, जो नागपुर के एक वकील हैं और उन्हें जून में गिरफ्तार किया गया था। वहीं कोम प्रकाश सीपीआई (माओवाद) के टॉप कमांडर हैं। पत्र की लिखी बातें तब सार्वजनिक हुईं जब पुणे पुलिस ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं और शीर्ष माओवादी नेतृत्व के बीच सम्बन्धों के साक्ष्य के रूप में इसे अदालत में प्रस्तुत किया।
 
दरअसल विवादों और दिग्विजय सिंह का पुराना रिश्ता है। समय-समय पर दिग्विजय सिंह ऐसे बयान देते रहते हैं जिनके कारण विवाद बढ़ता जाता है। अभी तक तो दिग्विजय सिंह पर आरोप थे कि वे बयानों के ज़रिये भाजपा और हिन्दुत्व पर अनर्गल आरोप लगाते हैं, लेकिन इस बार दिग्विजय सिंह पर आरोप काफ़ी गम्भीर हैं।
 
दिग्विजय सिंह पर आरोप है कथित तौर पर नक्सलियों से कनेक्शन का। ऐसे में देखना होगा कि अपने बचाव में किस तरह के तर्क दिग्विजय सिंह प्रस्तुत करते हैं। यदि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह से इस मामले पर पूछताछ हो गई और उनके कनेक्शन नक्सलियों से होने का कुछ खुलासा हो गया तो स्वाभाविक रूप से इसका फायदा भाजपा को मिलेगा।