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विश्लेषण: मध्य प्रदेश कांग्रेस की ‘गुटबाज़ी’ और मुख्यमंत्री पद के लिए ‘लॉबिंग’

20 Nov 2018
कमलनाथ ने किया सिंधिया का ‘समर्थन’, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी ‘खामोश’
 
NOV 20 (WTN) – मध्य प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी किसी से भी छिपी नहीं है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच आपसी गुटबाज़ी और खींचातानी के कारण ही कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर जिस तरह से बड़े नेताओं के बीच आपसी खींचातानी देखी गई, उससे तो ऐसा ही लगता है कि कांग्रेस की यही गुटबाजी कहीं कांग्रेस को इस बार फ़िर हार की कगार पर ना ले जाए।
 
मध्य प्रदेश कांग्रेस में वैसे तो नेताओं के कई गुट हैं, लेकिन तीन नेताओं के गुट प्रसिद्ध हैं। ये गुट हैं दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुट। बड़ा सवाल यही है कि यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आई तो मुख्यमंत्री कौन होगा। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि गुटबाजी में घिरी कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद के लिए दो, तीन नहीं बल्कि पांच से ज़्यादा नाम चर्चा में हैं। मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस पर तंज कसते हुए कह चुके हैं कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री के आठ-आठ नाम चल रहे हैं।
 
जहां तक दिग्विजय सिंह की बात है तो वे पहले ही साफ़ कह चुके हैं कि वे मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की रेस में नहीं हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि भली ही दिग्विजय सिंह मुख्ममंत्री बनने की रेस में शामिल नहीं हैं लेकिन मध्य प्रदेश में जो भी मुख्यमंत्री बनेगा उसमें उनकी मर्जी होना जरूरी है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के पुराने जनाधार वाले नेता रहे हैं और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता जगजाहिर है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो दिग्विजय सिंह पूरी कोशिश करेंगे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री ना बन पाएं। जिस तरह से टिकट वितरण के दौरान दोनों ही नेताओं के बीच तीखी बहस की खबरें सामने आईं थीं उससे तो यही कहा जा सकता है कि दिग्विजय सिंह सिंधिया की राह में सबसे बड़े बाधक बनेंगे।
 
ऐसे में कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह अजय सिंह को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पूरी लॉबिंग कर सकते हैं। अजय सिंह के पिता अर्जुन सिंह दिग्विजय सिंह के राजनीतिक गुरू कहे जाते हैं वहीं अजय सिंह भी दिग्विजय सिंह के काफ़ी क़रीबी हैं। इन दिनों जबकि भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में दिग्विजय सिंह को कमरा तक अलॉट नहीं हुआ है तो ऐसे में वे अजय सिंह के कमरे से ही अपना काम कर रहे हैं। अजय सिंह और दिग्विजय सिंह की यह करीबी साफ़ संकेत देती है कि दिग्विजय सिंह पूरी कोशिश करेंगे कि यदि कांग्रेस जीतती है तो अजय सिंह मुख्यमंत्री बनें।
 
इधर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भी मुख्यमंत्री पद की रेस में हैं। लेकिन सभी जानते हैं कि कमलनाथ को राज्य की बजाय केन्द्र की राजनीति में ही ज़्यादा रुचि है। खुद के मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर एक निजी न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में कमलनाथ ने साफ़ कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की भूख नहीं है। आगे कमलनाथ ने कहा, “अगर मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी सत्ता में आयी और राहुल गांधी ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें तो वे इसका समर्थन करेंगे और सभी मिलकर सिंधिया के साथ मिलकर काम करेंगे।”

अब देखना होगा कि यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो स्वाभाविक है कि मुख्यमंत्री पद के लिए घमासान मचेगा ही और यदि ऐसा होता है तो राहुल गांधी क्या फैसला लेते हैं और किसका नाम फाइनल करते हैं। लेकिन घमासान ना हो ऐसा लगता नहीं है क्योंकि जिस तरह के तेवर दिग्विजय सिंह के लग रहे हैं उससे तो यही लगता है कि उनकी पसंद का मुख्यमंत्री बनाने के लिए वे पूरी कोशिश करेंगे।
 
वहीं कमलनाथ ने अभी तो कह दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर सहमत हैं, लेकिन समय आने पर हो सकता है कि कमलनाथ के समर्थक उनके लिए लॉबिंग करें और यदि ऐसा होता है तो दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया तीनों ही गुट एक दूसरे के आमने-सामने होंगे। जो भी हो आना वाला समय राहुल गांधी के लिए काफ़ी परेशानी पैदा करने वाला है।