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विश्लेषण: विस्तार से जानिये कि क्यों बदल रही है माप की इकाइयां

21 Nov 2018
वैज्ञानिकों ने जताया प्लैंक स्थिरांक पर विश्वास, उसी के आधार पर होगा अब एक किलो का माप

NOV 21 (WTN) – यदि हम आपसे पूछें कि एक किलो में कितने ग्राम होता हैं, तो आप कहेंगे कि 1000 ग्राम, वहीं हम आपसे पूछें कि एक किलोमीटर में कितने मीटर होते हैं आप कहेंगे 1000 मीटर। आपका जवाब सही है। लेकिन अब माप की इकाई बदलने वाली है। आप पढ़कर चौक गये होंगे कि आखिर यह कैसे हो सकता है। आखिर पूरा मामला क्या है हम आपको बताते हैं विस्तार से।
 
दरसअल एक ऐतिहासिक मतदान में दुनिया के 50 से ज़्यादा देशों ने एक सुर में अंतरराष्ट्रीय मापन प्रणाली में परिवर्तन को अनुमति दे दी है। इस फ़ैसले के बाद वजन मापने की इकाई किलोग्राम और मापन की दूसरी इकाइयों की नई परिभाषाएं तय होने का रास्ता साफ़ हो गया है। यदि ऐसा होता है तो कहा जा रहा है कि इससे विभिन्न देशों के बीच व्यापार और अन्य मानवीय कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मापन इकाइयों में परिवर्तन के लिए वर्साय में एकत्र हुए वैज्ञानिकों ने खुशी जाहिर की। उनका कहना था कि इसके लिए उन्होंने दशकों इंतज़ार किया था और अब जबकि उन्हें मापन इकाइयों में परिवर्तन के लिए अनुमित मिल गई है तो वे जल्द ही दुनिया के सामने मापन के नये मात्रक सामने रखेंगे।
 
दरअसल इस कदम को मानवता के मापन और गुणन की दुनिया में क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। बीते शुक्रवार को ही विद्युत मापन की इकाई ऐम्पियर, ताप मापने की इकाई कैल्विन और पदार्थ की मात्रा नापने की इकाइ मोल की नई परिभाषाओं को भी अनुमोदन मिल गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरी दुनिया में स्वीकृत किलोग्राम की नई परिभाषा का बहुत बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा था।
 
दरअसल वैज्ञानिक चाहते थे कि किलोग्राम के बाट की पैमाइश के लिए किसी वस्तु का इस्तेमाल न हो जैसा कि अभी तक होता था। इसकी जगह वे भौतिकी में इस्तेमाल होने वाले प्लैंक के स्थिरांक को पैमाना बनाना चाहते थे। जिस तरह दूरी की नापने के लिए मीटर को स्टैण्डर्ड इकाई निर्धारित किया गया है उसी तरह किलोग्राम निर्धारित करने के बारे में भी सोचा जा रहा है।
 
फिलहाल मीटर प्रकाश द्वारा एक सेकेंड के 300वें मिलियन में तय की गई दूरी के बराबर है। अब बहुमत के बदलाव के पक्ष में वोट करने से किलोग्राम को निर्धारित करने के लिए प्लैंक के स्थिरांक का इस्तेमाल किया जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भौतिकी में मापन के लिए कई तरह के नियतांक या स्थिरांक का इस्तेमाल होता है। स्थिरांक किसी वस्तु की उस मात्रा को कहा जाता है जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें बदलाव नहीं होता है। ठीक इसी तरह प्लैंक का नियतांक है जो मैक्स प्लांक नाम के जर्मन वैज्ञानिक ने दिया था। यह बताता है कि किसी खास कण के अंदर ऊर्जा का वजन कितना होगा। प्लैंक का नियतंक 6.626176 x 10-34 joule-seconds के बराबर होता है।
 
पिछले क़रीब सौ सालों से ज़्यादा समय से फ्रांस में कड़ी सुरक्षा में रखे प्लेटिनम-इरीडियम मिश्र धातु के बने एक सिलेण्डर के द्रव्यमान को किलोग्राम की परिभाषा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसे 'ली ग्रांड के'  नाम से भी जाना जाता है। यह साल 1889 से विश्व का एकमात्र वास्तविक किलोग्राम माना जाता रहा है।
 
'ली ग्रैंड के' 129 वर्ष पुराना बाट है। दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने एक किलोग्राम के इस सबसे बड़े मानक को बदलने का फैसला कर लिया, क्योंकि इस बाट का क्षरण हो रहा था। कुछ साल पहले इस एक किलो के बाट में 30 माइक्रोग्राम का फर्क आया था। वैसै तो यह फ़र्क सिर्फ एक चीनी के दाने जितना है, लेकिन विज्ञान की दुनिया के लिए ये फर्क बहुत बड़ा है।
 
शुक्रवार को हुई जनरल कॉन्फ्रेंस ऑन वेट्स एंड मेजर्स में 60 देशों के प्रतिनिधियों ने वोट के जरिए तय किया कि अब से किलोग्राम को प्लैंक स्थिरांक के आधार पर मापा जाएगा। इसे मापने के लिए किब्बल तराजू का उपयोग होगा जो करंट से संचालित होता है।
 
पेरिस में स्थित “ली ग्रैंड के” की एक ऑफिशल कॉपी भारत के पास भी है। इसको दिल्ली स्थित नेशनल फिजिकल लैबरेटरी में रखा गया है। इसको नम्बर 57 भी कहा जाता है और यह भारत का परफेक्ट किलो है। कुछ दशकों पर नियमित रूप से इसे पेरिस भेजा जाता है जहां इसे चेक किया जाता है। भारत के सारे किलो को नम्बर 57 के हिसाब से ही तौला जाता है।
 
कहा जा रहा है कि मतदान के बाद किलोग्राम और अन्य मुख्य मानक इकाइयों को दोबारा परिभाषित किया जायेगा और ये 20 मई से प्रभावी होगा। मई 2019 के बाद मीटर और सेकेंड के साथ-साथ कुछ और इकाइयों के मानकों की परिभाषा में भी बदलाव होगा। वैज्ञानिकों ने ये फैसला किया है कि अब माप के लिए प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।