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विश्लेषण: क्या फ़िर होने जा रहे हैं नोटबंदी जैसे ‘हालात’?

22 Nov 2018
रखरखाव और नए नियमों के चलते देश की आधी एटीएम मशीनों पर लग सकता है ‘ग्रहण’
 
NOV 22 (WTN) – इस आधुनिक युग में एटीएम तो आजकल हर किसी की ज़रुरत हो चुकी है। बैंकों से पैसा निकालने के बजाय एटीएम से कभी भी किसी समय पैसा निकालना आसान है, जिसके कारण देश में हज़ारों की तादात में एटीएम मशीनें लगी हुईं हैं जिसका उपयोग देश की जनता कर रही है। लेकिन मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़, देश की लगभग 1.15 लाख एटीएम मशीनें अगले साल मार्च तक बंद हो सकती हैं।
 
कहा जा रहा है कि बंद होने वाली एटीएम मशीनों में 1 लाख ऑफ साइट एटीएम मशीनों और 15,000 व्हाइट लेबल एटीएम मशीनें हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के डेटा के अनुसार, सितम्बर तक भारत में 2,21,492 एटीएम मशीनें काम कर रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस रिपोर्ट को कॉनफेडरेशन ऑफ़ एटीएम इण्डस्ट्री (सीएटीएमआई) ने जारी किया है।

कहा जा रहा है कि बंद होने वाले इन एटीएम मशीनों में ज़्यादातार ग्रामीण क्षत्रों की होंगी। इसके पीछे रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि इन क्षेत्रों के एटीएम को चलाने में दिक्कतें हो रही हैं। लेकिन यदि ग्रामीण इलाकों में एटीएम मशीनें बंद होती हैं, तो ग्रामीणों को एटीएम बंद होने से पैसा निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और इसका ख़ामियाजा सरकार को भुगतना पड़ सकता है।
 
भारी तादात में एटीएम मशीनें बंद होने से लाखों लोगों की नौकरी को ख़तरा पैदा हो जाएगा और ऐसे में नौकरी जाने से देश की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीएटीएमआई की जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि एटीएम चलाने वाली बैंकों और नॉन बैंकिंग कम्पनियों को नोटबंदी और उसके बाद के समय में एटीएम में कैश नहीं रहने के कारण आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।
 
जानकारी के अनुसार एटीएम मशीनों के बंद करने के अन्य कारण भी है। जानकारी के मुताबिक़ बैंकों को इससे प्राप्त होने वाले राजस्व में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार एटीएम में पैसे डलवाने के खर्च में भारी वृद्धि हो गई है और बैंकों को अब 3500 करोड़ रुपए सिर्फ़ एटीएम मशीनों में पैसे डलवाने में खर्च करने पड़ेंगे।
 
कहा जा रहा है कि एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को लेकर जो नए नियम आए हैं उनके चलते पुरानी एटीएम मशीनों को चलाना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही इसके अलावा कैश मैनेजमेंट स्टैंडर्ड और कैश लोडिंग को लेकर भी नियम जारी हुए हैं। इससे एटीएम कम्पनियां, ब्राउन लेबल और व्हाइट लेबल एटीएम प्रदाता पहले ही नोटबंदी के दौरान हुए घाटे से जूझ रहे हैं।
 
इस बारे में सीएटीएमआई का कहना है कि अगर एटीएम लगाने वाली कम्पनियों के खर्चों में हुई वृद्धि को कम करने के लिए बैंक सहयोग नहीं करती है तो बड़ी संख्या में पूरे देश में एटीएम बंद हो सकते हैं औऱ यदि ऐसा होता है तो इससे देश के करोड़ों लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
 
अनुमान है कि एटीएम मशीनों के बंद होने से जनधन योजना के लाभार्थियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस योजना के तहत खोले गए बैंक खातों में सब्सिडी, मनरेगा का पैसा, विधवा पेंशन और दूसरी सरकारी मदद आती है। ऐसे में अगर एटीएम मशीनें बंद होती हैं, तो फिर से कैश के लिए बैंकों में लंबी लाइन लगानी पड़ेगी। कहा ज रहा है कि इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित डिजिटल इण्डिया मुहिम होगी। यदि एक साथ इतने सारे एटीएम बंद होते हैं तो शहरी इलाकों में नोटबंदी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।