ईवीएम: मतदान का सुरक्षित, सरल और आधुनिक साधन
NOV 27 (WTN) – कल यानि कि 28 नवम्बर को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होने जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी मतदान के लिए ईवीएम का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में आपके लिए ये जानना बेहद ज़रूरी हो जाता है कि आखिर ईवीएम कैसे काम करती है। कई बार कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाएं हैं कि ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है। आइये आपको ईवीएम मशीन की पूरी जानकारी देते हैं। लेकिन साथ ही हमारी आपसे गुजारिश है कि आप मतदान ज़रूर करें।
1. ईवीएम पांच मीटर लम्बी कंट्रोल और बैलेटिंग यूनिट से जुड़ी होती है। इसकी कंट्रोल यूनिट पीठासीन अधिकारी के पास रहती है, जबकि बैलेटिंग यूनिट वोटिंग कम्पार्टमेंट के अंदर रखी जाती है।
2. मतदान के दौरान मतदाता, वोटिंग कम्पार्टमेंट में जाकर बैलेटिंग यूनिट में अपने पसंदीदा प्रत्याशी के सामने वाला बटन दबाकर वोट कर सकता है।
3. एक ईवीएम में 64 उम्मीदवारों के नाम शामिल किए जा सकते हैं और एक मशीन में 16 नाम जोड़े जा सकते हैं।
4. यदि किसी निर्वाचन सीट पर 16 से ज़्यादा प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, तो एक साथ चार मशीनों को जोड़ा जाता है।
5. यदि किसी निर्वाचन सीट पर प्रत्याशियों की संख्या 64 से ज़्यादा है, तो वहां पर ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान किया जाता है।
6. ईवीएम में एक मेमोरी चिप रहती है, जिसमें परिणामों को स्थायी रूप से स्टोर किया जा सकता है।
7. मतगणना के दौरान ईवीएम का रिजल्ट बटन दबाया जाता है। जैसे ही इस बटन को दबाया जाता है, मशीन के डिस्प्ले में मतदान केंद्र पर डाले गये कुल वोटों की संख्या सामने आ जाती है।
8. जब तक पीठासीन अधिकारी कंट्रोल यूनिट का बैलेट बटन नहीं दबाता है, तब तक दूसरा मतदाता वोट नहीं डाल सकता है।
9. एक ईवीएम में अधिकतम 3,840 मत दर्ज किए जा सकते हैं। वैसे तो एक मतदान केंद्र पर 1,500 मतदाता ही वोट देते हैं।
10. ईवीएम का प्रयोग बिना बिजली के किया जा सकता है, क्योंकि इसमें एक बैटरी लगी होती है जिससे मशीन संचालित होती है।
11. ईवीएम की सहायता से मतगणना जल्दी हो जाती है और इसमें अवैध मतों की आशंका ना के बराबर है।
12. ईवीएम में परिणाम बटन के अलावा एक टोटल बटन भी होता है। इस बटन को दबाए जाने के समय तक डाले गए मतों की कुल संख्या दिख जाती है।
13. मतदान पूरा होने के बाद ईवीएम की बैटरी को बंद कर दिया जाता है।
14. भारत में पहली बार ईवीएम का प्रयोग मई, 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केन्द्रों पर हुआ था।
15. नवम्बर, 1998 के बाद से देश में होने वाले सभी आम चुनाव/उप-चुनावों में प्रत्येक संसदीय तथा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
16. साल 2004 के आम चुनाव में देश के सभी मतदान केन्द्रों पर क़रीब 10.75 लाख ईवीएम के इस्तेमाल के साथ लोकसभा चुनाव ई-लोकतंत्र में परिवर्तित हो गया। तभी से सभी लोकसभा और विधानसभा चुनावों और उपचनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है।