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विश्लेषण: क्या सुनियोजित है फ्रांस की हिंसा, या फ़िर जनता ने कर दिया है विद्रोह?

04 Dec 2018
ईंधन के बढ़े दामों के बाद जारी विरोध के कारण फ्रांस में एक दशक के सबसे ख़राब हालात, लग सकता है आपातकाल

DEC 04 (WTN) – फ्रांस देश का नाम सुनते ही आंखों के सामने आता है विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर और पेरिस की रंगीने रातें, वो देश जहां की क्रांति ने पूरी दुनिया को एक नई दिशा दी, लेकिन आज वही फ्रांस हिंसक प्रदर्शनों के दौर से गुजर रहा है। दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा परिषद के सदस्य फ्रांस में इन दिनों विरोध प्रदर्शन के कारण तबाही मची हुई है। फ्रांस में पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीज़ल पर टैक्स लगाने से जो महंगाई बढ़ी है, उसके विरोध में जनता सड़कों पर उतर आई है।
 
बढ़े हुए टैक्स और उसके कारण बढ़ी महंगाई के विरोध में हो रहे प्रदर्शन से पूरा पेरिस प्रभावित हुआ है। इस दौरान पुलिस और उपद्रवियों के बीच हुई झड़प में अब तक 133 लोग घायल हुए हैं, इसमें पुलिस के 23 जवान भी शामिल हैं। इधर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, अर्जेंटीना में चल रही G20 समिट से रविवार को लौटे और आने के बाद उन्होंने पेरिस में उपद्रव का जायजा लिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ्रांस में कार्बन उत्सर्जन घटाने और लोगों को एनवायरमेन्ट फ्रैंडली गाड़ियों का प्रयोग करने को प्रेरित करने के लिए पेट्रोल और डीज़ल के दामों में काफ़ी वृद्धि की गई। जानकारी के मुताबिक़, ईंधन पर लगने वाले टैक्स को साल 2017 में ही मंज़री दे दी गई थी। टैक्स बढ़ने के कारण पेट्रोल के दाम 7.6 प्रतिशत प्रति लीटर और डीज़ल के दाम 3.9 प्रतिशत प्रति लीटर बढ़ गये। इतना ही नहीं, अक्टूबर के महीने में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल और डीज़ल के दामों में वृद्धि हो गई, जिससे लोगों को गुस्सा और भी बढ़ गया।
 
ईंधन के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ी, और इसके कारण गुस्साए लोगों ने फ्रांस की राजधानी पेरिस की सड़कों पर उतरकर कारों में आग लगा दी और जमकर उत्पात मचाया। फ्रांस में बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्होंने अपने समूह को ‘यलो वेस्ट’ नाम दिया है। जानकारी के मुताबिक़, इस झड़प में अभी तक 8,000 से ज़्यादा प्रद्रर्शनकारी और 5,000 पुलिसवाले आपस में भिड़ चुके हैं, वहीं पुलिस ने अभी तक क़रीब 400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इधर कहा जा रहा है कि पेरिस की गलियों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों में मास्क पहने कुछ ‘अज्ञात लोग’ शामिल हो गए, और उन्होंने इस सामाजिक आंदोलन को हाइजैक कर लिया।
 
वहीं फ्रांस में सोशल मीडिया पर सरकार की वित्तीय और आर्थिक नीतियों की जमकर आलोचना शुरू हो गई है। लोगों का आरोप है कि सरकार की नीतियां अमीर को लाभ पहुंचाने वाली और निम्न आय वर्ग की खरीदने की क्षमता घटाने वाली हैं। इधर प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि राष्ट्रपित मैक्रों अमीर परिवार से आते हैं और इसलिए ही उन्हें आम जनता की परेशानी से कोई हमदर्दी नहीं है।
 
इधर बढ़ते ‘विद्रोह’ को देखते हुए फ्रांस सरकार के प्रवक्ता बेंजामिन ग्रिवॉक्स का कहना है, “फ्रांस पिछले एक दशक के सबसे ज़्यादा खराब नागरिक अशांति की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आपातकाल लागू करने पर विचार कर रहा है।”
 
इधर, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का इस विरोध प्रदर्शन के बारे में कहना है, “अधिकारियों पर हमले, वाणिज्य-व्यापार को ठप करना, राह चलतो लोगों और पत्रकारों को धमकी देना या आर्क डू ट्रौम्फ का उल्लंघन करना, किसी भी हालत में तर्कपूर्ण नहीं हो सकता है। इस हिंसा के लिए दोषी लोग बदलाव नहीं चाहते हैं, वे लोग सुधार नहीं चाहते हैं, उन्हें सिर्फ अराजकता चाहिए। उन सभी की पहचान की जाएगी और उन्हें न्याय की अंदर में लाया जाएगा।”
 
कहा जा रहा है कि फ्रांस में भड़की हिंसा सुनियोजित है और इसके पीछे किसी की साजिश है। शुरूआत में प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई का शांतिपूर्वक तरीके से विरोध कर रहे थे, लेकिन अचानक ही विरोध प्रदर्शन हिंसक हो उठा और देखते ही देखते पूरे पेरिस में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं होने लगीं। एक तरफ़ राष्ट्रपति मैक्रों का कहना है कि अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, तो दूसरी तरफ़ प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रपति मैक्रों की नीतियों के कारण देश की जनता परेशानी में है। देखना होगा कि आखिर क्या कुछ समाधान इस पूरे मसले का निकलता है। क्या तेल की बढ़ी हुई क़ीमतें फ्रांस की सरकार कम करेगी, या फ़िर फ्रांस की जनता को महंगाई के साथ समझौता करना होगा?