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मध्य प्रदेश में ईवीएम के जरिये कांग्रेस की सोची समझी ‘रणनीति’!

06 Dec 2018
कहीं कांग्रेस ने ‘सोची समझी रणनीति’ के तहत तो नहीं लगाए ईवीएम गड़बड़ी के आरोप?

DEC 06 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम 11 दिसम्बर को आने हैं। सभी कि निगाहें इस और लगी हैं कि क्या भाजपा लगातार चौथी बार जीत हासिल करेगी, या फ़िर कांग्रेस 15 सालों के बाद फ़िर से सत्ता में वापसी करेगी। नतीजें जो भी हों, वो तो 11 दिसम्बर को पता लगेंगे, लेकिन इतना साफ़ है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम कांग्रेस के लिए ज़रूरत से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हॉं, क्योंकि यदि कांग्रेस मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हारी, तो 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस का आत्मविश्वास बहुत कमज़ोर होगा।

अब इसे हार का डर कहें, या फ़िर जीत का आत्मविश्वास, कांग्रेस को चिंता सता रही है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, इसलिए पूरे मध्य प्रदेश में सभी ज़िला मुख्यालयों पर जहां पर ईवीएम रखी गई हैं, वहां पर रात-रात भर कांग्रेस कार्यकर्ता निगरानी रख रहे हैं। कांग्रेस को डर है कि ईवीएम के साथ किसी भी तरह की कोई छेड़छाड़ ना हो जाए।
 
ईवीएम की निगरानी के साथ ही कांग्रेस मतगणना के दिन भी लिए भी पूरी तरह चौकन्नी है। कांग्रेस को लग रहा है कि मतगणना के दिन भी कोई गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए इस दिन के लिए कांग्रेस ने एक विशेष योजना बनाई है। मतगणना के दिन किसी भी तरह की कोई भी गड़बड़ी ना हो, और यदि हो तो उसे कैसा रोका जाए, इसकी पूरी ट्रेनिंग कांग्रेस के सभी 229 प्रत्याशियों को दी जा रही है, और प्रत्याशियों को मतगणना से सम्बन्धित पूरी जानकारी दे रहे हैं खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ।
 
कांग्रेस के सभी 229 प्रत्याशियों को ट्रेनिंग कैम्प में बाक़ायदा बताया रहा है कि कैसे उन्हें मतगणना के दिन सुरक्षा और सावधानी बरतनी है, साथ ही उन्हें किस तरह से गड़बड़ियों को पहचानना और रोकना है। जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ईवीएम और मतगणना पर संदेह पैदा कर रही है उससे लगता है कि यह कांग्रेस की एक सोची समझी चाल है।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि ईवीएम की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस तरह-तरह के आरोप लगा रही है। कांग्रेस ईवीएम की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट और चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करा चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि सागर ज़िले की खुरई की ईवीएम 48 घण्टे बाद जमा हुईं जो कि गड़बड़ी की तरफ़ इशारा है। कांग्रेस के संगीन आरोपों के बाद वहां के रिटर्निंग ऑफ़िसर को हटा दिया गया। वहीं, भोपाल में पुरानी जेल, जहां कि स्ट्रांग रूम बनाया गया है, वहां पर सीसीटीवी कैमरों के बंद होने के शिकायत आई थी। इसी तरह सतना और खरगोन में भी कांग्रेस ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

तमाम तरह की इन्हीं घटनाओं के बीच, कांग्रेस के सभी 229 प्रत्याशियों को भोपाल में मतगणना के दिन किस तरह से सावधानी बरती जाए, इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है। कांग्रेस को डर है कि कहीं ईवीएम में गड़बड़ी ना की जाए जिससे उसे एक बार फ़िर से हार का सामना करना पड़े।
 
लेकिन निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। कांग्रेस की शिकायत के बाद मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी.एल.कांताराव ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी थी कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा में प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। वहीं भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा का कहना है कि शुरू से ही कांग्रेस की यह आदत रही है और वो ईवीएम और संवैधानिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है।
 
कांग्रेस के आरोपों में यदि सच्चाई है, तो उसे सबूतों के साथ इसे पेश करना चाहिए, नहीं तो निर्वाचन आयोग जैसी संस्था पर बेवज़ह आरोप लगाने के कोई भी औचित्य नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि ईवीएम गड़बड़ी के आरोप लगाना कांग्रेस की सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हो। क्योंकि यदि कांग्रेस जीतती है, तो कहेगी कि हमने (कांग्रेस) ईवीएम की गड़बड़ी नहीं होने दी इसलिए हम (कांग्रेस) जीते। वहीं यदि कांग्रेस हार गई, तो उसे हार का बहाना मिल जाएगा कि ईवीएम में गड़बड़ी थी।