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एक देश का अपने नागरिकों से आह्वान, आबादी बढ़ाओ!

11 Dec 2018
कम होती आबादी से सर्बिया की सरकार परेशान; जनसंख्या बढ़ाने कर रही तरह-तरह के ‘प्रयास’

DEC 11 (WTN) – भारत जैसे विकासशील देश अपनी बढ़ती आबादी के कारण परेशान हैं और सरकारें कोशिश कर रही है कि देश में लोग परिवार नियोजन अपनाएं और कम से कम बच्चे पैदा करें। लेकिन भारत से अलग दुनिया में एक देश है सर्बिया, जहां की सरकार अपने देश के युवा दम्पतियों से अपील कर रही है कि बच्चों को पैदा करो, आबादी बढ़ाओ। 'बच्चे पैदा करो, देरी मत करो’ जी हां यही कहना है सर्बिया का अपने देश के युवा दम्पतियों से। बच्चों की कम आबादी की समस्या को दूर करने के लिए सर्बिया में वहां की सरकार बाकायदा अभियान चला रही है।
 
जहां एक तरफ़ सर्बिया की सरकार बच्चे पैदा करने के लिए तरह-तरह के नारों से महिलाओं को प्रेरित कर रही है, तो दूसरी तरफ़ सर्बिया की महिलाओं का कहना है कि आबादी बढ़ाने के लिए नारे देने से कुछ नहीं होगा, सरकार को लोगों को बेहतर सहयोग देना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूरोपीय देश सर्बिया में बहुत लोग देश छोड़कर जा रहे हैं और इसके साथ जन्म दर भी तेजी से गिर रही है। सर्बिया में औसतन हर दो परिवार में तीन बच्चे हैं, जो कि यूरोप में सबसे कम है और इससे सर्बिया की आबादी गिरकर 70 लाख लोगों पर पहुंच गई है।
 
इधर सर्बिया की कम होती आबादी के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ भी काफ़ी चिंतित है। यूएन का मानना है कि साल 2015 तक सर्बिया की जनसंख्या 15 प्रतिशत तक और कम हो सकती है। देश में आबादी बढ़ाने और कम बच्चे पैदा करने की प्रवृत्ति दूर करने के लिए सर्बियाई सरकार को काफ़ी प्रस्ताव मिले हैं। एक प्रस्ताव के अनुसार, उन इलाकों में कम मंजिलों वाले मकान बनेंगे जहां बच्चों की दर कम है। इस योजना के बारे में सर्बिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुकिक का कहना है कि यह योजना एक अध्ययन पर आधारित है, जिसमें पता चला है कि दो से चार मंजिला घरों में रहने वाले दम्पतियों में बच्चे पैदा करने की दर दोगुना ज़्यादा है।
 
सरकार की इस दलील की सर्बिया के न्यूज़ पेपर में काफ़ी आलोचना हुई और इसकी परिहास भी बना। वहीं सर्बिया की डेमोग्राफिक इनचार्ज मिनिस्टर स्लाविका दुजोकिस डेजानोविक का इस बारे में कहना है कि बच्चे ना होने के पीछे एक कारण वातावरण भी हो सकता है, क्योंकि कई बड़े शहरों में जहां पर कि बड़े घर हैं वहां पर बच्चों की खेलने की आवाज़ सुनी जा सकती है, जबकि उनके पास उनके माता-पिता कॉफी का आनंद ले रहे होते हैं।
 
वहीं मंत्री डेजोनोविक ने बच्चे को जन्म देने के लिए प्रेरित करने स्लोगन प्रतियोगिता भी शुरू की थी, जिसमें कई तरह के स्लोगन आए थे, जैसे, “मां मैं अकेले नहीं रहना चहना, पापा मुझे भाई चाहिए।” वहीं एक स्लोगन में लिखा था, “प्रेम और बच्चे जीवन में सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।”
 
देश की आबादी बड़े, इसलिए पिछले साल मातृत्व देखभाल क़ानून पारित किया गया था, जिसमें माता-पिता के लिए कुछ अतिरिक्त सहायता प्रदान करने की बात है। क़ानून के मुताबिक़ जो भी मां तीसरे या चौथे बच्चे को जन्म देती है, तो उन्हें हर महीने 30,000 दिनार की सहायता 10 साल के लिए दी जाएगी।
 
वहीं बच्चे पैदा करने के बारे में सर्बिया के लोगों का कहना है कि बच्चे किसी पसंद नहीं है, वे भी बच्चे चाहते हैं लेकिन बढ़ती महंगाई और बेहतर ज़िन्दगी की तलाश में बच्चों के बारे में सोचना का समय ही नहीं मिलता। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सर्बिया में भारी तादात में महिलाएं काम करती हैं, लेकिन ना ही उनका वेतन अच्छा है और ना ही वे खुद अच्छी ज़िन्दगी जी पा रही हैं, ऐसे में बच्चे के बारे में वे सोच भी नहीं सकती हैं। अब देखना होगा कि सर्बिया सरकार की नीतियों के कारण वहां की महिलाएं बच्चे पैदा करने में रूचि दिखाती हैं कि नहीं, यदि सर्बिया की आबादी नहीं बढ़ती है, तो आने वाले समय में इस देश को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।