तीन राज्यों में भाजपा की हार के बाद अमित शाह की रणनीति पर ‘सवालिया निशान’
DEC 11 (WTN) – अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस को मिली जीत के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की चुनावी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। इन तीनों राज्यों में से दो राज्यों, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की पिछले 15 सालों से सरकार थी। जिस तरह से भाजपा की इन तीनों राज्यों में हार हुई है, उससे भाजपा के मिशन 2019 पर सवालिया निशान लग गये हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब अमित शाह की चुनावी रणनीति फेल साबित हुई है। बल्कि इससे पहले भी तीन बार अमित शाह को हार का सामना करना पड़ा है। दिल्ली, बिहार और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी अमित शाह की चुनावी रणनीति धरी रह गई थी और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार के बाद अब एक बार फ़िर से अमित शाह को इन राज्यों में कड़ी मेहनत करना होगी।
अमित शाह की चुनावी रणनीति सबसे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में असफल साबित हुई। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में आम आदमी पार्टी ने रिकॉर्ड तोड़ बहुमत के साथ चुनाव में जीत हासिल की थी और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल कर सभी को चौका दिया था। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी का खाता भी नहीं खुला था और भाजपा सिर्फ़ तीन सीटों पर ही सिमट कर रह गई थी। दिल्ली जैसे शिक्षित राज्य में जिस तरह से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था उसके बाद अमित शाह की कड़ी आलोचना हुई थी।
दिल्ली के बाद साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी अमित शाह की चुनावी रणनीति असफल साबित हुई थी। बिहार विधानसभा चुनाव में राज्य की 243 सीटों में से लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने सबसे ज़्यादा 80 सीटों पर जीत हासिल की थी, तो जेडीयू को 71 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस ने 27 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। उन चुनावों में भाजपा को 53 और एलजीपी और आरएलएसपी को दो-दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बिहार विधानसभा चुनाव में आरेजडी, जेडीयू और कांग्रेस का महागठबंधन था।
बात करें इसी साल हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव की, तो यहां पर भी अमित शाह भाजपा को जीत नहीं दिला सके थे। राज्य में भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई लेकिन वह बहुमत के आंकड़े से 8 सीट पीछे रह गई। कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस को 78 सीटों पर तो जेडीएस को 37 सीटों पर जीत हासिल हुई, वहीं जेडीयू की सहयोगी बसपा को एक सीट पर जीत हासिल हुई। कर्नाटक चुनाव के बाद कांग्रेस ने राजनीतिक चाल चली और जेडीयू को समर्थन देकर भाजपा को सत्ता से दूर कर दिया। दक्षिण का यह एकमात्र राज्य था जहां पर भाजपा अपनी सरकार बनने में पहले कामयाब रही थी, और यहां पर पांच सालों से कांग्रेस की सरकार थी। इसके बाद भी अमित शाह कर्नाटक में भाजपा को जीत नहीं दिला सके।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार के बाद अमित शाह की नेतृत्व क्षमता पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गये हैं। यह तीनों ही राज्य भाजपा का गढ़ माने जाते थे और इन्हीं तीनों राज्यों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले भाजपा की इन तीनों राज्यों में करारी हार के बाद अब अमित शाह को नये सिरे से रणनीति बनानी होगी ताक़ि वे कांग्रेस का सही से मुक़ाबला कर सकें।