विश्लेषण: कमलनाथ को गांधी परिवार के क़रीबी होने का मिला ईनाम
DEC 14 (WTN) – मध्य प्रदेश में 15 सालों के बाद सत्ता में वापसी के बाद आखिरकार कांग्रेस ने राज्य के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ के नाम का ऐलान कर दिया है। भोपाल और दिल्ली में गुरुवार दिनभर चली बैठकों के बाद, देर रात कांग्रेस ने कमलनाथ का नाम फायनल कर दिया। युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनुभवी कमलनाथ के बीच, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गांधी परिवार के क़रीबी रहे छिन्दवाड़ा सांसद कमलनाथ को तरजीह दी।
मध्य प्रदेश में लगातार तीन विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई है। ऐसे में राहुल गांधी को ऐसे नेता को मुख्यमंत्री बनाना था जो कि सबको साथ लेकर चल सके। यह सभी जानते हैं कि मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच राजनीति वर्चस्व की लड़ाई है। कहा जा रहा था कि दिग्विजय सिंह पूरी कोशिश करेंगे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री ना बन सकें, और हो सकता है कि दिग्विजय सिंह के विरोध के कारण ही राहुल गांधी ने युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को दरकिनार करते हुए गांधी परिवार के क़रीबी कमलनाथ को मुख्यमंत्री चुना।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और छिन्दवाड़ा से सांसद कमलनाथ का जन्म 18 नवम्बर 1946 को हुआ। इंटरनेट पर उपलबध जानकारी के मुताबिक़, कमलनाथ जाति से खत्री पंजाबी हैं और उनके पिता कानपुर के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम महेंद्रनाथ और माता का लीला है। कमलनाथ देहरादून स्थित दून स्कूल के छात्र रहे हैं और राजनीति में आने से पहले उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज कोलकाता से स्नातक किया था।
कमलनाथ पहली बार 24 अक्टूबर 1979 को छिन्दवाड़ा आए थे और 1980 में सिर्फ़ 34 साल की उम्र में छिन्दवाड़ा से लोकसभा का चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1984, 1989, 1991, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में भी कमलनाथ ने छिन्दवाड़ा सीट से जीत हासिल की। अब तक के अपने चुनावी सफ़र में कमलनाथ सिर्फ़ एकबार ही लोकसभा का चुनाव हारे हैं।
साल 1996 में जैन हवाला केस में कमलनाथ का नाम आने की वजह से उन्हें टिकट नहीं दी गई थी। इसके बाद कमलनाथ की पत्नी अल्का नाथ को टिकट दिया गया और उन्होंने जीत हासिल की। साल 1997 में अल्का नाथ ने छिन्दवाड़ा लोकसभा सीट से इस्तीफ़ा दिया और उसके बाद छिन्दवाड़ा सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा ने कमलनाथ को शिकस्त दी थी।
कमलनाथ साल 1991 से 1994 तक केन्द्र सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री रहे और उसके बाद 1995-96 तक वे केन्द्रीय वस्त्र मंत्री, 2004 से 2009 तक केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री, 2009 से 2011 तक वे केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री और 2011 से 2014 तक केन्द्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्यमंत्री भी रहे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कमलनाथ की गिनती देश के सबसे रईस नेताओं में की जाती है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ ने जो हलफनामा चुनाव आयोग को दिया था, उसके मुताबिक उनके पास लगभग 207 करोड़ रुपए की चल-अचल सम्पत्ति है।
कमलनाथ हमेशा से ही गांधी परिवार के क़रीबी और वफ़ादार रहे हैं। कमलनाथ को साल 1970 में संजय गांधी ने कांग्रेस में शामिल कराया था। आपातकाल में उनकी भूमिका के बाद "इन्दिरा के दो हाथ, संजय गांधी और कमलनाथ" का नारा काफी चर्चित हुआ था। कहा जाता है कि कमलनाथ उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए राजी कराया था।
13 दिसम्बर का दिन कमलनाथ के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है। कल यानि कि 13 दिसम्बर के दिन कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा राहुल गांधी के द्वारा हुई। तो वहीं 13 दिसम्बर 1979 को राहुल गांधी की दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने छिन्दवाड़ा आकर वहां की जनता को कहा था, “मैं तीसरे बेटे के रूप में कमलनाथ को आपको सौंप रही हूं, ये छिन्दवाड़ा की जनता की सेवा करेंगे।” इन्दिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक के क़रीबी रहने के कारण कमलनाथ को उसका ईनाम मिला और वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।