विश्लेषण: ‘आसान’ नहीं है मध्य प्रदेश में किसानों की कर्ज माफ़ी
DEC 15 (WTN) – मध्य प्रदेश में 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस की सरकार में वापसी हुई है और उसने कड़े मुक़ाबले में भाजपा को शिकस्त दी है। लगातार तीन विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में सत्ता में वापसी के लिए काफ़ी लोक लुभावन वादे किये थे। कहा जा रहा है कि इन्हीं वादों के दम पर कांग्रेस कड़े मुक़ाबले में भाजपा को हारने में कामयाब रही है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कहा था कि वो जो वादे कर रही है वो वादे नहीं हैं, बल्कि 'वचन' है।
वैसे तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से कई वादे किये, लेकिन जिस वादे पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं वो है किसानों की कर्ज माफ़ी का। दरअसल चुनाव प्रचार के दौरान मध्यप्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐलान किया था कि कांग्रेस सरकार बनने के दस दिन में किसानों का कर्ज माफ़ नहीं हुआ, तो वे मुख्यमंत्री बदल देंगे। राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के कई नेताओं ने भी चुनाव के दौरान कहा था कि किसान का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ़ किया जाएगा।
15 सालों तक सत्ता में रहने में रहने के बाद विपक्ष में आई भाजपा ने अभी से ही कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा का कहना है कि वो इंतज़ार कर रही है कि दस दिनों के अंदर किसानों का कर्जा माफ़ हो। कमलनाथ 17 दिसम्बर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं, ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों के कर्ज माफ़ी की ही है।
लेकिन किसानों की कर्ज माफ़ी का वादा पूरा करना इतना आसान नहीं है जितना लग रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के किसानों पर सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण विकास बैंक और निजी बैंकों का क़रीब 70 हजार करोड़ रुपये से ज़्यादा का कर्ज है। इसमें 56 हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज 41 लाख किसानों ने लिया है। वहीं, लगभग 15 हज़ार करोड़ रुपये डूबत कर्ज (एनपीए) है।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने कर्ज माफ़ी की जो योजना लागू की थी, वही योजना मध्य प्रदेश में भी कर्ज माफ़ी योजना का आधार बनेगी। यूपीए सरकार के समय भी कालातीत कर्ज ही माफ़ हुआ था। वहीं हाल ही में कर्नाटक में ज़रूर नियमित कर्ज पर प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसे मध्य प्रदेश में भी अपनाया जा सकता है
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पूर्व वित्तमंत्री और अर्थशास्त्री पी.चिदम्बरम ने कर्ज माफ़ी को लेकर एक फार्मूला तैयार किया है। कहा जा रहा है कि राज्य सरकार जून 2009 के बाद के कर्जे को माफ़ करेगी, क्योंकि इसके पहले यूपीए 2 के समय कर्ज माफ़ कर दिया गया था। यदि ऐसा होता है, तो इससे क़रीब 33 लाख कर्जदार किसानों को लाभ मिलेगा।
इधर, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने कृषि और सहकारिता विभाग को तैयारी के निर्देश दिए हैं। वहीं सहकारिता विभाग से बैंकों में किसानों द्वारा लिये गये कर्ज का ब्यौरा भी मांगा गया है। लेकिन जबकि पहले से ही मध्य प्रदेश सरकार पर क़रीब 1 लाख 92 हजार करोड़ कर्ज है, तो ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर कर्ज माफ़ी के लिए कांग्रेस सरकार के पास रुपया आएगा कहां से।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस सरकार की कर्ज माफ़ी योजना में सिर्फ़ खेती के लिए लिया गया कर्ज ही माफ़ किया जाएगा। कृषि उपकरण और अन्य व्यवस्थाओं के लिए लिया गया कर्ज माफ़ नहीं किया जाएगा। वहीं, सबसे पहले किसानों के सहकारी बैंकों के कर्ज को माफ़ किया जाएगा, जिसकी सीमा 2 लाख तक होगी। यदि किसान ने अन्य बैंकों से भी कर्ज लिया है, तो सिर्फ़ सहकारी बैंकों से लिये गये कर्ज को ही माफ़ किया जाएगा। कहा जा रहा कि किसानों की कर्ज माफ़ी से सरकार पर लगभग 20 हज़ार करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा।
कर्ज माफ़ी के लिए फिलहाल जिस फॉर्मूले पर विचार किया जा रहा है, उसमें डूबत कर्ज को माफ़ करने के साथ नियमित कर्ज पर लगभग 25 हज़ार रुपये प्रोत्साहन दिया जाएगा। लेकिन इसके लिए किसानों को पहले कालातीत बकाया राशि बैंक को वापस लौटानी होगी।
विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान कांग्रेस सरकार ने किसानों से कर्ज माफ़ी का वादा तो कर दिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि राज्य सरकार पर जब खुद इतना कर्ज है तो फ़िर ऐसे में किसानों की कर्ज माफ़ी के लिए पैसा आएगा कहां से। किसानों की कर्ज माफ़ी ही नहीं, कांग्रेस ने कई ऐसे वादे किये हैं, ऐसे में उन सभी वादों को पूरा करने के लिए राजस्व जुटाना होगा। अब देखते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार कितने वादे पूरा कर पाती है। यदि मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार वादों पर खरा नहीं उतरी, तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।