मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मोदी सरकार देगी ‘बड़ा तोहफ़ा’
DEC 24 (WTN) – केन्द्र की मोदी सरकार जल्द ही आम लागों को एक ख़ास तोहफ़ा दे सकती है जिसके बाद खासतौर से मध्यमवर्ग के लोगों के लिए काफ़ी राहत मिलने की उम्मीद है। क्या है यह ख़ास तोहफ़ा आइये जानते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि माल एवं सेवा (जीएसटी) परिषद ने बीते शनिवार को 23 वस्तुओं पर जीएसटी की दर कम करी दी है जिसके बाद आम जनता को काफ़ी राहत मिलती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ अब कहा जा रहा है कि मध्यमवर्गीय लोगों को राहत देने के लिए अब अगले महीने होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में निर्माणाधीन आवासीय इकाइयों और और कम्प्लीशन (निर्णयकार्य सम्पन्न होने का प्रमाण पत्र) की प्रतीक्षा में तैयार फ्लैट पर कर की दर को घटाकर पांच प्रतिशत किया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में ऐसे तैयार फ्लैट पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत है जिन्हें कार्यपूर्ण होने का प्रणामण पत्र नहीं मिला है। हालांकि, रियल एस्टेट सम्पत्ति की उस ख़रीदी पर जीएसटी नहीं लगता है, जिन्हें बिक्री के समय कार्य-पूर्ण होने का प्रमाणपत्र मिल चुका है।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार इस बारे में एक अधिकारी का कहना है कि इस मामले में 12 प्रतिशत की जीएसटी दर का भार क़ायदे से तो बिल्डरों द्वारा निर्माण वस्तुओं पर दिये गये करों के कारण आंशिक रूप से कम हो जाता है। इसलिए ऐसे में निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी की वास्तविक दर क़रीब 5 से 6 प्रतिशत ही होना चाहिए, लेकिन बिल्डर उत्पादन सामग्री पर चुकाए गए करों के लाभ का फ़ायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक़, जीएसटी परिषद के सामने रखे गये प्रस्तावों में एक यह भी है कि 80 प्रतिशत निर्माण सामग्री पंजीकृत डीलरों से खरीदने वाले बिल्डरों के लिये जीएसटी दर को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में बिल्डर्स, निर्माण में इस्तेमाल हो रही वस्तुओं के लिये नक़दी में भुगतान कर रहे हैं और उपभोक्ताओं को सामग्री खरीद में चुकाए गए कर पर मिलने वाले लाभ का फायदा नहीं पहुंचा रहे हैं। इसलिये माना जा रहा है कि उन्हें औपचारिक व्यवस्था के अंतर्गत लाने की ज़रुरत है।
फिलहाल में फ्लैट और घर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश निर्माण उत्पाद, पूंजीगत सामान और सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि सीमेंट पर 28 प्रतिशत का जीएसटी लगता है।
इधर, केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से चलाई जा रही आवासीय योजनाओं पर वर्तमान में जीएसटी दर सिर्फ 8 प्रतिशत है, जिसे बिल्डर द्वारा आईटीसी के ज़रिये वहन किया जाता है जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युवल मिशन, राजीव आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित राज्य सरकारों की ओर से चलाई जा रही आवासीय योजनाएं इस सुविधा के अंतर्गत आती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी से पहले निर्माणाधीन भवनों पर टैक्स की कुल दर बहुत ज़्यादा होती थी जिसमें 4.5 प्रतिशत सेवा कर के साथ 1 से 5 प्रतिशत तक वैट शामिल था। इतना ही नहीं, निर्माण में इस्तेमाल होने वाली इनपुट सामग्रियों पर 12.5 प्रतिशत एक्साइज़ ड्यूटी 12.5 से 14.5 प्रतिशत वैट के साथ देनी होती थी। वहीं इनपुट पर एंट्री टैक्स भी लगता था। वहीं, आईटीसी को शामिल करने के बाद ऐसे भवनों पर कुल जीएसटी दर 15-18 प्रतिशत होती थी।
जो लोग समय-समय जीएसटी के विषय में नकारात्मक बातें करते रहते हैं इनके लिए निर्माणाधीन भवनों पर अब लगने वाला टैक्स एक बढ़िया उदाहरण है कि जीएसटी के बाद महंगाई कम हुई है। यदि मोदी सरकार निर्माणाधीन मकानों को सस्ता करने में कामयाब रही, तो देश की मध्यवर्गीय जनता को काफ़ी राहत मिलेगी। जहां अभी निर्माणाधीन मकानों में जीएसटी की दर 12 प्रतिशत, उसे 5 प्रतिशत करने से आम जनता पर महंगाई का बोझ कम होगा। कहा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मोदी सरकार की यह योजना भाजपा के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी।