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विश्लेषण: लोकसभा चुनाव से पहले किसानों के लिए प्रधानमंत्री मोदी खेलेंगे ‘मास्टर स्ट्रोक’

29 Dec 2018
मोदी सरकार दे सकती है किसानों को ‘डायरेक्ट बेनिफिट’; तेलंगाना का रायतु बंधु मॉडल पर हो सकता है अमल

DEC 29 (WTN) – भारत में यदि लोकसभा या विधानसभा चुनाव जीतना है, तो किसानों को खुश करना ज़रूरी है क्योंकि यदि किसान नाराज़ रहा तो लोकसभा से लेकर पंचायत चुनाव तक किसी भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भाजपा की हार के बाद कहा जा रहा है कि भाजपा इन तीनों ही राज्यों में किसानों की नाराज़गी को दूर नहीं कर पाई। लोकसभा चुनाव से पहले तीन राज्यों में मिली हार भाजपा के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, इसलिए लोकसभा चुनाव 2019 के मैदान में उतरने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों की बेहतरी के लिए कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़ केन्द्र की मोदी सरकार 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले किसानों के लिए एक बड़े राहत पैकेज की तैयारी कर रही है। कहा जा रहा है कि इसमें किसानों के लिए वित्तीय पैकेज भी शामिल हो सकता है। जानकारी के अनुसार इस बारे में कृषि मंत्रालय ने एक राहत पैकेज की योजना के विषय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चर्चा की है। इस राहत पैकैज में किसानों को तेलंगाना के ‘रायतु बंधु मॉडल’ के आधार पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की सुविधा दी जा सकती है।
 
कहा जा रहा है कि यदि केन्द्र सरकार किसानों को राहत देने वाली इस योजना को लागू करती है तो इससे 1.3 लाख करोड़ रुपए का खर्च आ सकता है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, कृषि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक में इसके बारे में एक प्रस्तुति दी है और बैठक के दौरान किसानों के सामने आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई है। जिसके बाद कहा जा रहा है कि जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी किसानों के लिए किसी बड़ी योजना का ऐलान कर सकते हैं।
 
जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार मौजूदा विकल्पों में से सबसे ज़्यादा तेलंगाना की रायतु बंधु योजना पर ध्यान दे रही है। इस योजना के तहत तेलंगाना की राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 12,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इस योजना में राज्य सरकार हर मौसम में किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और मज़दूरी इत्यादि खर्चों के लिए प्रति एकड़ 4000 रुपये देती है।
 
हालांकि ये योजना इतनी आसान नहीं है जितना लग रहा है। किसानों की हित की इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने से पहले तेलंगाना राज्य की टीआरएस सरकार ने काफ़ी मेहनत की है। इसमें राज्य सरकार ने ज़मीन रिकॉर्ड को बाकायदा डिजिटल किया और उसके बाद लाभार्थियों की पहचान की जिसके बाद पात्र किसान को प्रति एकड़ 4000 रुपये दिये।
 
कहा जा रहा है कि किसानों को खुश करने के लिए केन्द्र सरकार मध्य प्रदेश की भावांतर योजना की तरह की भी कोई योजना शुरू कर सकती है। यानि कि यदि किसान को उसकी फसल का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मिलता है, तो दाम के इस अंतर को सरकार चुका सकती है। यदि यह योजना लागू होती है, तो किसानों को दिये जाने वाली अंतर राशि का 70 प्रतिशत केन्द्र सरकार और 30 प्रतिशत राज्य सरकार भुगतान कर सकती है।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के पीछे के कई कारणों में एक कारण किसानों की नाराज़गी कही जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी के समय किसानों के सामने नकदी की समस्या आई जिसके कारण किसान उस दौरान खाद-बीज नहीं खरीद सके, तो वहीं अब किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है जिसके कारण किसान परेशान है।
 
तीन राज्यों में हार के बाद चर्चा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले केन्द्र की मोदी सरकार किसानों की कर्ज़ माफ़ी की योजना भी लागू कर सकती है। साथ ही कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भी बदलाव की तैयारी हो रही है जिससे कि ज़्यादा से ज़्यादा किसानों को इसका उचित लाभ मिल सके।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कृषि मंत्रालय ने सात राज्यों द्वारा की गई कृषि ऋण माफ़ी योजना, ओडिशा जैसे राज्यों में लागत पर दी गई छूट और तेलंगाना की रायतु बंधु योजना समेत कई राज्यों के विभिन्न मॉडलों का अध्ययन किया है जिसके आधार पर किसानों को सहूलियत देने की योजना पर काम चालू है। लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा से पहले यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कोई बड़ी योजना की घोषणा कर दी, तो कहा जा सकता है कि यह मोदी का एक बड़ा दांव होगा।