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विश्लेषण: लोन रिकवरी ना होने से बड़ा बैंकों को एनपीए; ‘दोषी’ बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई करने के मूड में सरकार

29 Dec 2018
वित्तीय वर्ष 2017-18 में बैंक का जीएनपीए बढ़कर हुआ 11.2 प्रतिशत; बैंक को ‘गुमराह’ करने वाले अधिकारियों पर होगी दण्डात्मक कार्रवाई

DEC 29 (WTN) – आपने देखा होगा कि समय-समय पर सरकारी बैंकों द्वारा दिये गये ऐसे कर्ज़ पर सवाल उठाते रहे हैं जिनकी रिकवरी नहीं हो पाती है। आरोप लगता रहता है कि बैंक के कर्मचारियों-अधिकारियों ने गुमराह करके ऐसे लोन बांट दिये जिससे बैंकों पर भारी लोन आ गया। लेकिन अब केन्द्र सरकार ऐसे बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों पर नकेल कस रही है जो इसके लिए ज़िम्मेदार रहे हैं।
 
जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में बांटे गए ऐसे लोन जिनकी रिकवरी नहीं हो सकी है, उसके लिए केन्द्र सरकार ने सरकारी बैंकों के क़रीब 6 हज़ार कर्मचारियों-अधिकारियों को ज़िम्मेदार माना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुताबिक़ ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी।
 
केन्द्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि राष्ट्रीयकृत बैकों के उन 6 हज़ार से ज़्यादा कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी जिनके गुमराह करने के कारण बैकों पर भारी लोन आ गया है। कहा जा रहा है कि ऐसे बैंक अधिकारियों के ख़िलाफ़ अलग-अलग तरह के दण्डात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
 
वित्तमंत्री जेटली के अनुसार जिम्मेदार ठहराए गए कर्मचारियों-अधिकारियों पर छोटे और बड़े दण्ड लगाए गए हैं, इनमें बर्खास्तगी, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और डिमोशन जैसी कार्रवाई शामिल है। इस सबके बाद देखा जाए तो साफ़ है कि बैंकों की लोन रिकवरी ना होने में कहीं ना कहीं बैंक के ही कर्मचारी और अधिकारी ज़िम्मेदार रहते हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार इन पर सख्ती दिखाए ताकि आने वाले समय में इस पर लगाम लग सके।
 
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय बैंकों से मिले इनपुट के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में 6,049 कर्मचारी और अधिकारी एनपीए खातों में स्टाफ़ की कमी को लेकर ज़िम्मेदार हैं। इस बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि कर्मचारियों की ग़लती पर निर्भर करता है कि उनके ख़िलाफ़ कितने कड़े कदम उठाए जाएंगे और सभी मामलों में सीबीआई और पुलिस के पास शिकायत दर्ज की जाएगी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश के 19 राष्ट्रीय बैंक में से पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक की ओर से राजकोष में 21, 388 करोड़ रुपए के घाटे की बात सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान बैंक को 6,861 करोड़ रुपये का संयुक्त नुकसान भी हुआ है। सरकार ने वैसे साफ़ किया है कि वित्तीय वर्ष के शुरुआती 6 महीनों में सार्वजनिक क्षेत्रों के बैकों ने 60,713 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड रिकवरी की है। यह इस अवधि के दौरान रिकवर की गई राशि की तुलना में दो गुनी है।
 
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैंकों का जीएनपीए वित्तीय वर्ष 2017-18 में बढ़कर 11.2 प्रतिशत या 10,390 अरब रुपये पर पहुंच गया है। एक साल पहले बैंकिंग प्रणाली का जीएनपीए 9.3 प्रतिशत पर था। भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान कुल जीएनपीए में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की जीएनपीए 8,950 करोड़ रुपये थी। इस तरह सरकारी बैंकों में जीएनपीए उनके सकल ऋण के 14.6 प्रतिशत के बराबर था। वित्तीय वर्ष 2016-17 में बैंकिंग प्रणाली का सकल एनपीए 9.3 प्रतिशत पर था। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 11.7 प्रतिशत था।
 
वहीं बीते वित्तीय वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बड़े खातों (पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक कर्ज़ वाले) के जीएनपीए का हिस्सा बढ़कर 23.1 प्रतिशत हो गया, जो इससे पिछले वित्तीय वर्ष में 18.1 प्रतिशत पर था। बीते वित्तीय वर्ष में रत्न एवं आभूषण क्षेत्र का कुल एनपीए बढ़ा है। इसका मुख्य कारण पंजाब नेशनल बैंक का 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला है। इस घोटाले के मुख्य आरोपी हीरा और जेवरात कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी हैं।