वास्तुशास्त्र के अनुसार ही होना चाहिए घर में रसोईघर की दिशा
JAN 16 (WTN) – यदि आप वास्तुशास्त्र में विश्वास करते हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वास्तुशास्त्र में रसोईघर के लिए भी कुछ निर्धारित दिशा निर्देश दिये गये हैं। यदि आप वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोई घर बनाते हैं, तो पूरे घर में बरकत रहती है। दरअसल वास्तुशास्त्र बहुत कुछ विज्ञान पर आधारित है जिसके अनुसार रसोई घर का निर्माण करने से डिजाइन सम्बन्धित और स्वास्थ्य सम्बन्धित परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।
आइये आपको बताते हैं कि रसोईघर का निर्माण करते समय वास्तुशास्त की किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
रसोईघर घर कभी भी नैऋत्य कोण में नहीं होना चाहिए, ऐसा होने से यहां रहने वाले हमेशा बीमार रहता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि घर में अग्नि वायव्य कोण में हो तो वहां रहने वाले लोगों के मन में शान्ति की कमी होती है इसके कारण अक्सर झगड़ा होता रहता है।
यदि घर में अग्नि उत्तर दिशा में हो तो यहां रहने वालों को धन हानि होती है। वहीं यदि अग्नि ईशान कोण में हो तो यहां रहने वाले लोगों में बीमारी और झगड़े अधिक होते हैं, इतना ही नहीं ऐसा करने से धन हानि और संतान उत्पत्ति में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि घर में अग्नि मध्य भाग में हो तो यहां रहने वालों को हर प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं यदि कुआं रसोईघर के पास होगा तो घर की स्त्री चंचल स्वभाव की होगी और काम के ज़्यादा बोझ के कारण थकी-थकी से रहेगी।
वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोईघर हमेशा आग्नेय कोण में ही होना चाहिए। वैसे रसोईघर के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे अच्छी मानी गई है, लेकिन रसोईघर को उत्तर-पश्चिम में भी बनाया जा सकता है। यदि घर में अग्नि आग्नेय कोण में हो तो यहां रहने वाले कभी भी बीमार नहीं होते और हमेशा सुखी जीवन व्यतीत करते हैं।
यदि भवन में अग्नि पूर्व दिशा में हो तो यहां रहने वालों का कभी भी ज़्यादा नुकसान नहीं होता है। वैसे रसोईघर हमेशा आग्नेय कोण या पूर्व दिशा में होना चाहिए या फिर इन दोनों के बीच भी हो तो अच्छा रहता है, लेकिन फ़िर भी रसोईघर के लिए उत्तम दिशा आग्नेय ही मानी गई है।