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अब इंजीनियर्स को मिलेंगे नौकरी के लिए ‘लाइसेंस’

06 Feb 2019
इंजीनियरिंग में एक ‘क्रान्तिकारी बदलाव’ की तैयारी में मोदी सरकार

FEB 06 (WTN) – यदि आप इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद नौकरी ढूंढ रहे हैं और योग्यता के बाद भी आपको देश या विदेश में नौकरी ढूंढने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो जल्द ही इसका समाधान निकलने वाला है। केन्द्र सरकार जल्द ही इंजीनियर्स के लिए नई लाइसेंसी प्रणाली को अपनाने जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ इंडियन काउंसिल ऑफ़ इंजीनियर्स का जल्द ही गठन किये जाने का प्रस्ताव है। इसके द्वारा एक परीक्षा का आयोजन किया जाएगा जिसे पास करने के बाद ही नौकरी मिल पाना सम्भव होगा।
 
इंडियन काउंसिल ऑफ़ इंजीनियर्स का गठन मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया की तर्ज पर होगा। जानकारी के अनुसार, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद प्रोफेशनल इंजीनियरिंग बिल-2019 पर इन दिनों काम कर रहा है। इंजीनियर्स से जुड़े इस बिल के अनुसार, बीटेक, एमटेक या फ़िर पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री लेने के बाद इंडियन काउंसिल ऑफ़ इंजीनियर्स द्वारा आयोजित एक परीक्षा को पास करना होगा।

इस परीक्षा को पास करने के बाद उत्तीर्ण विद्यार्थियों को एक लाइसेंस दिया जाएगा और इसी लाइसेंस के बाद उन्हें कहीं पर इंजीनियरिंग से जुड़ी नौकरी मिल पाएगी। सभी आईआईटी, एनआईटी, एआईसीटीई और मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों को इस परीक्षा को पास करना जरुरी होगा। इस परीक्षा के द्वारा पता किया जा सकेगा कि इंजीनियरिंग पास विद्यार्थी नौकरी के लिए कितना योग्य है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, इंजीनियर्स के लिए दो तरह की परीक्षाएं आयोजित करने का प्रावधान है। बीटेक करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए एक परीक्षा का आयोजन किया जाएगा, तो वहीं एमटेक या फ़िर पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों के लिए दूसरी तरह की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इंडियन काउंसिल ऑफ़ इंजीनियर्स द्वारा आयोजित इस परीक्षा को पास करने और उसके बाद लाइसेंस हासिल करने वाले विद्यार्थी इस लाइसेंस के आधार पर देश के साथ-साथ विदेश में भी जॉब करने के योग्य माने जाएंगे।

यदि ऐसा करने में मोदी सरकार कामयाब रहती है, तो इसे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम कहा जा सकता है। देखा गया है कि हर साल लाखों की तादात में इंजीनियर्स पास होते हैं लेकिन उनमें से काफ़ी कम मेें ही नौकरी लायक योग्यता होती है। ऐसे में नौकरी देने वाली कम्पनियों को प्रारम्भ में पता ही नहीं चल पाता है कि जिन्हें उन्होंने नौकरी दी है वे कितने योग्य हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ़ इंजीनियर्स द्वारा दिये जाने वाले लाइसेंस के बाद अब कम्पनियों को यह सुनिश्चित हो जाएगा कि वे जिन्हें नौकरी पर रख रहे हैं वे सच में योग्य हैं।