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तोअब ‘फायदे’ का सौदा साबित होगी बैंक और पोस्ट ऑफ़िस में एफ़डी

15 Feb 2019
एक बार फ़िर से निवेश का ‘बेहतर’ विकल्प साबित होगी एफ़डी

FEB 15 (WTN) – यदि आपकी बैंक या पोस्ट ऑफ़िस में एफ़डी है या फ़िर आप एफ़डी करने जा रहे हैं तो अब आने वाले दिनों यह आपको लिए फ़ायदे का सौदा साबित होने जा रही है। जैसा कि आप जानते हैं कि अभी तक नियम के अनुसार इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 194 ए के तहत एक वित्तीय वर्ष के दौरान एफ़डी पर मिलने वाली ब्याज की रकम यदि 10,000 रुपये से ज़्यादा होती है, तो उस ज़्यादा रकम पर 10 प्रतिशत टीडीएस काट लिया जाता है।
 
लेकिन अब बजट में नये नियम के अनुसार टीडीएस की सीमा को बढ़ाकर 40,000 रुपए करने का प्रस्ताव किया गया है। बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इससे टैक्सपेयर्स को तो बहुत बड़ी राहत मिलेगी है, लेकिन इससे बैंकों को भी फ़ायदा होगा क्योंकि एक बार फ़िर से लोगों में एफ़डी लोकप्रिय होगी और बैंकों के पास जमा रुपया बढ़ेगा।
 
मौजूदा नियमानुसार बैंक या पोस्ट ऑफिस में एफ़डी करने पर टीडीएस छूट की सीमा 10,000 रुपए है। उदाहरण के तौर पर यदि आप स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में 3 लाख रुपये की एफ़डी 6.80 प्रतिशत की ब्याज दर पर एक साल के लिए कराते हैं, तो आपको 3 लाख रुपये की रकम पर साल भर में ब्याज के रूप में 20,400 रुपये मिलेंगे। ब्याज की यह रकम 10,000 हज़ार रुपये की टीडीएस सीमा से 10,400 रुपये ज़्यादा है और इसी ज़्यादा रकम पर टीडीएस काटा जाएगा।
 
नियमानुसार यदि आपकी ब्याज से होने वाली इनकम 10,000 रुपये से ज़्यादा हो जाती है तो आपको बैंक डिपॉजिट पर टीडीएस कटने से बचने के लिए बैंक को 15 G/H फॉर्म भरकर देना होता है। वहीं यदि आप इस फॉर्म को भरकर जमा कराना भूल गए, तो आपके ब्याज की रकम से टीडीएस काटा जाएगा। इतना ही नहीं, टीडीएस कटने के बाद भी यदि आपकी आय इनकम टैक्स छूट सीमा से कम हो, तो भी आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा।
 
लेकिन मोदी सरकार के नये बजटीय प्रस्ताव के बाद टीडीएस छूट की सीमा 40,000 रुपये होने से उन लोगों को काफ़ी फ़ायदा होगा जिनका जीवनयापन एफ़डी पर मिलने वाले ब्याज पर होता है। अब नये नियमों के अनुसार जब बैंक या पोस्ट ऑफ़िस में की गई एफ़डी पर सालाना ब्याज 40,000 रुपये से ज़्यादा होगा तभी टीडीएस काटा जाएगा। यानि कि यदि आपकी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में एफ़डी है और एक साल के लिए एफ़डी की दर 6.80 प्रतिशत वार्षिक है तो आपको 5,80,000 रुपये तक की एफ़डी पर मिलने वाले ब्याज पर कोई भी टीडीएस नहीं कटेगा। क्योंकि इस पर वार्षिक ब्याज 39,440 रुपये बनता है।
 
बैंकिग सेक्टर के लोगों का मानना है कि एफ़डी पर टीडीसी छूट की सीमा बढ़ने से बैंकों को फ़ायदा ही होगा क्योंकि ग्राहक एक बार फ़िर से निवेश के बढ़िया विकल्प के रूप में एफ़डी की तरफ़ रुख करेगा। टीडीएस छूट की सीमा सिर्फ़ 10,000 रुपये होने से बैंकों में एफ़डी कम संख्या में हो रही थीं, लेकिन अब टीडीएस छूट की सीमा 40,000 रुपये होने से लोगों का रुझान एक बार फ़िर से एफ़डी की तरफ़ बढ़ेगा।