HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

बैंक समेत कई संस्थानों में टेक्नोलॉजी के कारण ‘कम’ होते रोजगार के अवसर!

25 Feb 2019
बड़ा सवाल: क्या कम्प्यूटर के ज्यादा उपयोग के कारण बढ़ रही है देश में बेरोजगारी?

FEB 25 (WTN) – भारत जैसे देश की विशाल जनसंख्या के लिए नौकरियां मुहैया करना किसी भी सरकार के लिए ‘आसान’ काम नहीं है। चुनाव के समय राजनीतिक दल हर साल लाखों की तादात में नौकरी देने का वादा तो कर देते हैं, लेकिन हकीकत है कि समय के साथ-साथ टेक्नोलॉजी के उपयोग के कारण नौकरियों में ‘कमी’ आ रही है। पहले किसी काम को करने के लिए यदि 10 कर्मचारियों की जरूरत होती थी तो अब कम्प्यूटर और अन्य तकनीक के उपयोग के कारण उसी काम को करने के लिए तुलनात्मक रूप से कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।
 
भारत में जब कम्प्यूटर नया-नया आया था तो उसका विरोध इस आशंका के आधार पर किया जाता था कि इसके कारण नौकरियों पर ‘नकारात्मक’ असर पड़ेगा, उस समय इस विचारधारा की सभी ने हंसी उड़ाई थी लेकिन समय के साथ अब यह ‘आशंका’ सही साबित होती जा रही है। जानकारी के मुताबिक भारतीय बैंकों में टेक्नोलॉजी के उपयोग के कारण नौकरियों के अवसर दिनों दिन कम होते जा रहे हैं, जिसका असर यह है कि देश में बैंकिंग सेक्टर में रोजगार की आशा लगाए युवाओं को निराशा हाथ लग रही है।
 
बात करें देश के सबसे बैंक एसबीआई यानि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की तो इसमें आने वाले पांच सालों तक रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों के स्थान पर सिर्फ़ 75 प्रतिशत नये लोगों की भर्ती की जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कम्प्यूटर और अन्य टेक्नोलॉजी के उपयोग के कारण बैंक में सम्बन्धित कार्य जल्दी और कम कर्मचारियों की सहायता से हो पा रहे हैं, ऐसे में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने रिटायर्ड हो रहे कर्मचारियों की तुलना में कम कर्मचारियों की भर्ती का फैसला लिया है। यानि कि वित्त वर्ष 2018 की शुरुआत में एसबीआई ने रिटायर्ड हो रहे 12,000 लोगों की जगह सिर्फ़ 10,000 लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की।
 
जानकारी के मुताबिक, देश में पढ़े लिखे करोड़ों युवा रोजगार के लिए मेहनत कर रहे हैं, ऐसे में एसबीआई को इस टफ कॉम्पिटिशन के कारण योग्य उम्मीदवार मिल रहे हैं। बेरोजगारी का आलम कहें या फिर एसबीआई में नौकरी के लिए चाहत, पिछले दो सालों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में लिपिक के 8,000 पदों के लिए क़रीब 28 लाख लोगों ने आवेदन किया और बैंक को इस टफ कॉम्पिटिशन में एमबीए और इंजीनियर के रूप में उच्च शिक्षित कर्मचारी मिले।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत ही नहीं दुनिया भर में कम्प्यूटर के कारण आई नई टेक्नोलॉजी के कारण बैंकों ने कर्मचारियों की संख्या को कम करना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन की प्रसिद्ध बैंक एचएसबीसी ने जहां देश में अपने नेटवर्क को आधा करने का फैसला किया हैं तो वहीं स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने भी ऑटोमेशन के कारण अपनी 200 शाखाओं को बंद कर दिया है।

यह सही है कि नई टेक्नोलॉजी के कारण संस्थानों में काम तेजी से और कुशलतापूर्वक सम्पन्न होता है जिसका लाभ मानव जाति को मिल रहा है, लेकिन भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में नई टेक्नोलॉजी के कारण नौकरियों का कम होना चिंता का कारण है। काफी समय से यह मांग उठती रही है कि सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए जल्द से जल्द कानून बनाना चाहिए जिससे आने वाले समय में बढ़ती जनसंख्या का दबाव देश पर ना पड़े और देश के युवाओं को नौकरियां मिल सके। यदि ऐसा नहीं होता है तो आने वाले समय में टेक्नोलॉजी धीरे-धीरे लाखों की तादात में नौकरियों खत्म करने की ओर बढ़ रही है।