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जानिए विस्तार से कि आखिर क्या है जीएसपी और भारत पर कितना पड़ेगा इसका असर?

06 Mar 2019
जीएसपी के तहत सिर्फ़ 1.90 करोड़ डॉलर मूल्य की वस्तुओं पर ही पड़ेगा असर; भारत को नहीं होगा ज्यादा नुकसान

MAR 06 (WTN) – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस फ़ैसले को कि वे भारत का नाम उन देशों की सूची से बाहर कर रहे हैं जो सामान्य कर-मुक्त प्रावधानों (जीएसपी) का लाभ उठा रहे हैं, भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों के बीच एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत का नाम उन देशों की सूची में शामिल था जो अमेरिका से सामान्य कर-मुक्त प्रावधान (जीएसपी) कार्यक्रम का लाभ उठा रहे हैं। यह लाभ उन उत्पादों पर उठाया जाता है जिनका निर्यात अमेरिका को किया जाता है।
 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फ़ैसले के बाद अमेरिका के कानून के अनुसार ये बदलाव अधिसूचना जारी होने के दो महीने बाद से लागू हो जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी की इस सूची में शामिल देशों को निर्यात में विशेष तरजीह दी जाती है और इसमें शामिल देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लिया जाता है।
 
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का इस कड़े कदम के बारे में कहना है कि उन्होंने ये फ़ैसला इसलिए लिया है क्योंकि भारत अब वैधानिक पात्रता मानदंडों का 'सही तरीके से पालन नहीं' कर रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका का जीएसपी प्रोग्राम साल 1970 में शुरू हुआ था और तभी से भारत इसका लाभ उठा रहा है।
 
भारत हमेशा से ही जीएसपी का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। जीएसपी के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि उन्होंने ये फ़ैसला इसलिए लिया है क्योंकि उन्हें भारत से ये 'आश्वासन' नहीं मिल पाया है कि वह (भारत) अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को 'बराबर' की छूट देगा। ट्रम्प का साफ कहना है कि भारत में 'पाबंदियों' के कारण उसे (अमेरिका) व्यापारिक नुकसान हो रहा है।
 
लेकिन जानकारों के मुताबिक अमेरिका द्वारा जीएसपी यानि कि सामान्य तरजीही व्यवस्था के तहत कुछ भारतीय उत्पादों को आयात शुल्क में मिलने वाली छूट को समाप्त किये जाने के फ़ैसले से भारत के निर्यात पर कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत जीएसपी के तहत यूएस को 5.6 अरब डॉलर के सामानों का निर्यात करता है, लेकिन इसमें केवल 1.90 करोड़ डॉलर मूल्य की वस्तुएं ही बिना किसी शुल्क वाली श्रेणी में आती हैं इसलिए कहा जा रहा है कि भारत को अमेरिका के इस कदम का कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा।
 
अमेरिका के इस कदम से जिन वस्तुओं पर असर पड़ सकता है उनमें मुख्य रूप से हैं चिकित्सा उपकरण, डेयरी उत्पाद और कृषि उत्पाद। इधर चिकित्सा उपकरणों एवं डेयरी उत्पादों के बारे में अमेरिका की मांग पर भारत सरकार का कहना है कि भारत सरकार इस मामले में ‘तार्किक समाधान’ चाहती है लेकिन देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं और जरूरतों के बीच एक ‘संतुलन कायम’ किये जाने की जरूरत है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमों के अनुसार विकसित देश विकासशील देशों को जीएसपी के अंतर्गत गैर-पारस्परिक एवं बिना किसी भेदभाव के आधार पर लाभ उपलब्ध कराते हैं। भारत को जीएसपी की सूची से बाहर किये जाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की दलील है कि भारत, अमेरिका को अपने बाजारों तक बराबर एवं उचित पहुंच प्रदान करने को लेकर ‘आश्वस्त’ करने में ‘असफल’ रहा है। इधर अमेरिकी दावे के जवाब में भारत सरकार का कहना है कि अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘उचित संतुलन’ कायम किये जाने की जरूरत है।