HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की “एकला चलो रे” की नीति!

08 Mar 2019
मध्य प्रदेश में कांग्रेस को खुद पर पूरा ‘यकीन’, राज्य की सभी 29 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव
 
MAR 08 (WTN) – मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के समर्थन से सरकार चला रही कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव में “एकला चलो रे” की नीति पर काम करने जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटों पर ‘अकेली’ ही अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। राज्य की सभी 29 लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस ने प्रत्याशियों के नामों पर ‘मंथन’ पूरा कर लिया है और जल्द ही प्रत्याशियों के नामों की घोषणा हो सकती है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में कल देर रात तक चली छानबीन समिति की बैठक में राज्य की सभी 29 सीटों पर चर्चा की गई और ज्यादातर सीटों पर नामों के पैनल बनाये गये हैं। लोकसभा चुनाव में जीत के लिए दम लगा रही कांग्रेस पूरी रणनीति के साथ काम कर रही है इसलिए उसने मुख्यमंत्री कमलनाथ की परम्परागत छिन्दवाड़ा सीट पर भी पैनल बनाया है। अब किस सीट पर किसका नाम फाइनल होता है इसके बारे में CEC की बैठक में अन्तिम फैसला लिया जाएगा।
 
मध्य प्रदेश की 29 सीटें कांग्रेस के लिए काफ़ी मायने रखती हैं क्योंकि इस बार कांग्रेस को मध्य प्रदेश में 15 से 20 सीटें जीतने का विश्वास है। लेकिन यदि पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें, तो पिछले लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई थी। राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से सिर्फ़ दो सीटों पर ही कांग्रेस जीत हासिल कर सकी थी। मोदी लहर के चलते कांग्रेस छिन्दवाड़ा और गुना जैसी परम्परागत सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी।

वैसे राजनीति में कुछ भी हो सकता है और इसका उदाहरण मध्य प्रदेश की राजनीति है क्योंकि जहां विधानसभा में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए बसपा और सपा ने कांग्रेस को समर्थन दिया है तो वहीं केन्द्र में भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए तीनों पार्टियां साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रही हैं। लेकिन यदि आंकड़ों पर गौर करें तो कांग्रेस, बसपा और सपा ये तीनों पार्टियां मिलकर भी चुनाव लड़तीं, तो भी ये पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर नहीं दे सकती थीं।
 
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को मध्य प्रदेश में 54.02 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को 34.89 प्रतिशत मत मिले थे और वो सिर्फ़ दो सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। इधर बसपा को सिर्फ़ 3.80 प्रतिशत वोट तो समाजवादी पार्टी को 0.75 प्रतिशत मत ही मिल सके थे। यानि कि यदि आंकड़ों के आधार पर देखें तो यह तीनों ही पार्टियां मिलकर भी इस लोकसभा चुनाव में चुनाव लड़ती हैं तो भी यह तीनों ही पार्टियां इस स्थिति में नहीं हैं कि वे भाजपा को टक्कर दे सकें।
 
ऐसे में कांग्रेस ने रणनीति के तहत इस लोकसभा चुनाव में अकेले ही चुनाव लड़ने का फ़ैसला लिया है क्योंकि कांग्रेस जानती है कि सपा और बसपा के साथ चुनाव लड़ने से एक तो उसे कुछ सीटें इन पार्टियों को देना पड़ेंगी तो वहीं दूसरी तरफ जनता के बीच यह सन्देश जाएगा कि कांग्रेस पार्टी अकेले अपने दम पर भाजपा को नहीं हरा सकती। इसलिए कांग्रेस पार्टी ने राज्य की सभी 29 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। कांग्रेस को विश्वास है कि राज्य की कमलनाथ सरकार के किये गये कामों और केन्द्र की सत्ता विरोधी लहर के कारण वो मध्य प्रदेश की 15 से 20 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है।