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मोदी सरकार की ‘कूटनीति’ के चलते ‘दहशत’ में पाकिस्तान!

09 Mar 2019
पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत की ‘जवाबी’ कार्रवाई से ‘बैकफुट’ पर पाकिस्तान
 

MAR 09 (WTN) – पुलवामा आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति के कारण पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के अड्डों पर हुई एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान की सेना, वहां की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई और वहां पर रह रहे आतंकी अभी भी डर के साये में हैं। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद बालाकोट में भारत की जवाबी कार्रवाई से आतंकियों की नींद उड़ी हुई है और वहां पर हालात अभी तक सामान्य नहीं हो सके हैं।
 
पाकिस्तान में सेना और आतंकियों को डर सता रहा है कि भारत कहीं फ़िर से जैश के ठिकानों पर हमला ना कर दे इसलिए पाकिस्तान ने गिलगिट, डीजी खान, बहावलपुर, सुकुर, रहीमयार खान और सियालकोट हवाई अड्डे अभी तक यात्री विमानों के उड़ान के लिए बंद कर रखे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बहावलपुर जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख अड्डा है। 26 फरवरी को भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान ने इन हवाई अड्डों को अस्थायी तौर पर बंद कर रखा है और इस इलाके से गुजरने वाली सभी हवाई सेवाएं बंद हैं।
 
भारत की एयर स्ट्राइक का ऐसा डर पाकिस्तान के अंदर था कि 27 फरवरी से 5 मार्च तक कराची, लाहौर और पेशावर के हवाई अड्डों से भी यात्री उड़ानों पर पाबंदी लगा दी गई थी। आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान को डर सता रहा है कि यदि आतंकियों ने फ़िर से भारत में किसी आतंकी गतिविधि को अंजाम दिया तो भारत फ़िर से आतंकियों के गढ़ पर हमला कर सकता है। वहीं पूरी दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान ने मुम्बई हमले के आरोपी हाफिज सईद के संगठन पर प्रतिबंध की बात कही है, लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तानी सेना ने सईद की सुरक्षा बढ़ा दी है।
 
पुलवामा आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार की ताबड़तोड़ आक्रामक कार्रवाइयों के बाद पाकिस्तान में इतनी दहशत है कि आतंकी हाफिज सईद को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने शुक्रवार को लाहौर में जमात उद दावा (जेयूडी) मुख्यालय में खुतबा पढ़ने से ही रोक दिया। जानकारी के मुताबिक वहां पर हाफिज सईद की जगह पर सरकार की तरफ से नियुक्त मौलाना ने नमाज पढ़वाई और साप्ताहिक खुतबा पढ़ा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि करीब दो दशक पहले जमात उद दावा के मुख्यालय जामिया मस्जिद अल कदासिया की स्थापना के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि सरकार की तरफ से नियुक्त मौलाना ने जुम्मे के दिन खुतबा पढ़ा हो। भारत के दबाव का ही असर है कि जेडीयू परिसर में पंजाब सरकार ने जेडीयू की सभी गतविधियों पर रोक लगा दी है। पंजाब सरकार ने वहां के सभी आवासीय क्वार्टर, पुस्तकालय और किताब की दुकानों को सील कर दिया है और वहां पर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है।
 
इधर मोदी सरकार की कूटनीति के कारण पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़े पाकिस्तान को अब समझ आ रहा है कि यदि उसने समय रहते आतंकियों पर नियंत्रण नहीं रखा तो इसके नतीजे उसे भुगतने पड़ेंगे। इसी कड़ी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को कहना पड़ा है कि उनकी सरकार ऐसे किसी भी हथियारबंद समूह को पाकिस्तान में काम नहीं करने देगी जो दूसरे देश में हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देता हो।
 
पुलवामा हमले के बाद जिस तरह से मोदी सरकार ने सैन्य नीति से लेकर कूटनीति तक पाकिस्तान को घेरा है, उससे साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तान सरकार इन दिनों डर के साये में है। जहां एक तरफ भारत, पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूएन और एफएटीएफ में घेरने की कोशिश कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ़ आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का विकल्प खुला होने की बात दोहरा कर भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान आतंक और आतंकियों का साथ देकर बुरी तरह से फंस और घिर चुका है और अब जो भी कार्रवाई होगी वो आरपार की होगी।