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जानिए मतदान के बाद अंगुली पर लगने वाली वोटर इंक के बारे में विस्तार से

27 Mar 2019
लोकसभा चुनाव: 90 करोड़ वोटर्स के लिए 26 लाख वोटर इंक बोतल की होगी ज़रूरत

MAR 27 (WTN) – चुनाव में मतदान के बाद अंगुली पर लगने वाली स्याही का सभी को क्रेज रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंगुली पर लगने वाली यह स्याही कहां से आती है और इसकी क्या क़ीमत होती है? यदि आप यह सब नहीं जानते हैं, तो हम आज आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि चुनाव के दौरान यह स्याही, बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली के नाखून पर लगाई जाती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव के दौरान मतदाताओं की अंगुली पर लगाई जाने वाले नीली स्याही का खर्च करोड़ों में आता है। भारत में वोटर इंक बनाने व सप्लाई करने का काम हैदराबाद की रायडू लैब्स और मैसूर की मैसूर पेंट्स एंड वॉर्निश लिमिटेड करती हैं। यह दोनों कम्पनियां, भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी वोटर इंक की सप्लाई करती हैं।

जानकारी के मुताबिक़, 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने वोटर इंक की 26 लाख बोतल का ऑर्डर किया है,  और इससे क़रीब 90 करोड़ वोटर्स की अंगुली पर मतदान के बाद निशान लगाया जाएगा। 90 करोड़ वोटर्स के लिए बनाई जानी वाली वोटर इंक की क़ीमत 33 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
 
2009 के लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार वोटर इंक की क़ीमत में दो गुने से ज़्यादा वृद्धि हुई है। 2009 के लोकसभा चुनाव के समय वोटर इंक पर क़रीब 12 करोड़ रुपये खर्च आया था। मतदाताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए, पिछली बार के मुकाबले इस बार वोटर इंक की 4.5 लाख बोतलें अधिक मंगाई गई हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक बोतल में 10 मिलीलीटर इंक होती, जिससे क़रीब 350 मतदाताओं की अंगुली पर निशान लगाया जा सकता है।
 
2004 के लोकसभा चुनाव तक, मतदान के दौरान मतदाता की अंगुली पर सिर्फ़ एक डॉट लगाया जाता था,  लेकिन 2006 में चुनाव आयोग ने डॉट की जगह पर एक लम्बी सीधी लाइन लगाने का फ़ैसला लिया, जिसके कारण वोटर इंक की खपत भी बढ़ गई, और इसके बाद अब हर पोलिंग बूथ को वोटर इंक की दो बोतलें दी जाती हैं। इस लोकसभा चुनाव में, जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़े राज्य यूपी में क़रीब 3 लाख बोतल वोटर इंक की जरूरत पड़ेगी, तो वहीं सबसे कम क़रीब 200 बोटल वाटर इंक की जरूरत लक्षद्वीप में पड़ेगी।

भारत में पहली बार वोटर इंक का इस्तेमाल 1962 के चुनाव में किया गया, यह देश का तीसरा आम चुनाव था। वोटर इंक को नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ऑफ इंडिया के रासायनिक फार्मूले के आधार पर तैयार किया जाता है। वोटर इंक, साधारण स्याही की तरह नहीं होती है और ऊंगुली पर लगने के 60 सेकेंड बाद ही सूख जाती है।
 
दरअसल वोटर इंक सिल्वर नाइट्रेट में घुली डाई होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिल्वर नाइट्रेट रंगहीन विलियन होता है, और अंगुली पर लगने वाला रंग डाई का होता है। अंगुली पर वोटर इंक लगने के बाद, सिल्वर नाइट्रेट त्वचा से निकलने वाले पसीने में मौजूद सोडियम क्लोराइड से क्रिया करके सिल्वर क्लोराइड बनाता है, वहीं धूप के सम्पर्क में आने के बाद यह सिल्वर क्लोराइड टूटकर धात्विक सिल्वर में बदल जाता है। चूंकि धात्विक सिल्वर पानी या वार्निश में घुलनशील नहीं होता है, इसलिए इसे शरीर में लगने के बाद इसे आसानी से साफ़ नहीं किया जा सकता है।