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भारतीय रेलवे का दावा, ‘इन’ तरीकों को अपनाने से अब देरी से नहीं चलेंगी ट्रेनें!

15 Apr 2019
समय पर ट्रेनों को चलाने के लिए रेलवे ने उठाए ‘बड़े कदम’!
 
APR 15 (WTN) – हर साल कई कोशिशें करने के बाद भी भारतीय रेलवे समय पर ट्रेनों को नहीं चला पा रही है। ट्रेनों के लेट चलने के कारण हर रोज़ यात्रियों का समय तो खराब होता ही है साथ ही उन्हें अन्य परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। लेकिन समय के साथ-साथ भारतीय रेलवे अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि दुर्घटना ना हों और ट्रेनें समय पर चलें।

ट्रेनों के लेट होने के कारणों की काफ़ी समय से रेलवे समीक्षा कर रहा है, जिसके बाद समय-समय पर इसके लिए काफ़ी कदम भी उठाए गये लेकिन फिर भी किसी ना किसी कारण से ट्रेनों के लेट होने का सिलसिला जारी है। ट्रेनों के लेट होने की कई वजहों में से एक वजह है 20 से 24 कोच वाली ट्रेनों में पानी भरने में लगने वाला समय। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी इतनी बड़ी ट्रेन में पानी भरने में डेढ़ घंटे से भी ज्यादा का समय लगता है। लेकिन इस समय को कम करने के लिए रेलवे ने अब कई रेलवे स्टेशनों पर कम्प्यूटरीकृत जल शोधन प्रणाली स्थापित की है।
 
रेलवे का दावा है कि कम्प्यूटरीकृत पानी रिफिलिंग सिस्टम के आने के बाद इतनी बड़ी ट्रेनों के कोचों में पानी भरने में सिर्फ़ 5 से 7 मिनट का समय लगेगा। इतना ही नहीं, ट्रेनों के मैंनटेनेंस में समय की बचत के लिए रेलवे ने स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारियों के आने जाने का समय बचाने के लिए उन्हें कई स्टेशन पर होवरबोर्ड भी उपलब्ध कराए हैं। ट्रेनों में हो रही देरी की एक वजह और ढूंढते हुए रेलवे ने सम्बन्धित शिकायतों से निपटने के लिए ‘रैपिड सी एण्ड डब्ल्यू’ का भी गठन किया है जिससे इस विभाग से सम्बन्धित शिकायतों का जल्द से जल्द समाधान हो सके।

मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर रेलवे ज़ोन ने सभी रेलवे मण्डल को तय समय के अनुसार ट्रेनों को चलाने का आदेश जारी किया है। उत्तर रेलवे ने दिल्ली और अम्बाला रेलवे मण्डल को ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान में 90% निपुणता हासिल करने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा ज़ोन में स्थित सभी स्टेशनों को समय सारणी का पालन करने का आदेश भी जारी किया गया है।

रिकॉर्ड के अनुसार, रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ट्रेनों की समय की पाबंदी के मामले में साल 2017-18 सबसे खराब साल रहा। CAG की एक रिपोर्ट में ट्रेनों के देरी से चलने के पीछे एक बड़ा कारण सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक़, ट्रेनों की देरी का एक बड़ा कारण सरकार का स्टेशन पुनर्विकास ड्राइव है क्योंकि इसके कारण स्टेशनों पर ट्रेनों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं छोड़ा गया है। वहीं देरी का एक अन्य मुख्य कारण कम वाशिंग पिट लाइनें और स्टेबलिंग लाइनें होना बताया गया है।

बुनियादी ढांचे की कमी को भी ट्रेनों की देरी का एक बड़ा कारण माना गया है। यह तो यात्रियों ने भी महसूस किया है कि ट्रैक अपलब्ध नहीं हो पाने का कारण ट्रेनों को बाहरी सिग्नल पर या फ़िर बड़े स्टेशनों के पहले वाले स्टेशनों पर इंतज़ार करना पड़ता है। प्लेटफॉर्म खाली होने पर ही पीछे वाले स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों को बड़े स्टेशनों पर जगह मिल पाती है।

जब ट्रेनों के लेट होने की चर्चा चल रही है तो आपको बता दें कि जापान में ट्रेनें समय पर चलने के लिए मशहूर हैं। नवम्बर 2017 में इस्कूबा एक्सप्रेस ने तय समय से 20 सेकेंड पहले चलने के लिए सार्वजनिक रूप से यात्रियों से माफ़ी मांगी थी। खैर भारतीय रेल की जापानी रेल से तुलना बेमानी है, लेकिन हां इतना हो सकता है कि ट्रेनों के लेट होने के जो कारण हैं उन्हें पहचान कर उन्हें दूर किया जाए।
 
ट्रेनों के लेट होने की समस्या और लगातार इसके बारे में मिल रही शिकायतों के बाद भारतीय रेलवे ट्रेनों के लेट होने की वजहों को तलाशने के बाद उन वजहों के समाधान के लिए चिंतित दिख रहा है। इसलिए भारतीय रेलवे ने ट्रेनों की लेटलतीफी पर ब्रेक लगाने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग करने के साथ-साथ नये तरीकों का अपनाना शुरू कर दिया है। अब देखते हैं कि रेलवे की यह कोशिशें कितना कामयाब हो पाती हैं और इन कोशिशों के कारण ट्रेनें समय पर चल पाती हैं कि नहीं?