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श्रीलंका को ‘नजरअंदाजी’ पड़ी भारी, कोलम्बो में हुए धमाकों की खुफिया सूचना पहले दे चुका था भारत!

22 Apr 2019
श्रीलंका में हुए धमाकों में चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात पर ‘शक’, भारत ने पहले ही किया था पड़ोसी देश को ‘सतर्क’

APR 22 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार आठ धमाकों के बाद एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक़, श्रीलंका के पुलिस चीफ पुजुथ जयासुंदरा ने दस दिन पहले ही देशभर में यह अलर्ट जारी किया था कि रविवार से पहले आत्मघाती हमलावर देश (श्रीलंका) के प्रमुख चर्चों को निशाना बना सकते हैं। अब इस बात की पुष्टि श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने भी कर दी है कि हमले के जानकारी का अलर्ट पहले से था और यह अलर्ट भारतीय खुफिया एजेंसियों ने जारी किया था।

प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के मुताबिक़, ''इस तरह के हमले का अंदेशा जांच एजेंसियों को पहले से ही था, लेकिन उन्‍होंने इसकी जानकारी को ना तो साझा किया और ना ही इस पर कोई ठोस कदम उठाया।” विक्रमसिंघे के अनुसार सरकार इस मामले की जांच करेगी कि पहले से हमले की पूरी जानकारी होने के बाद भी सावधानी क्‍यों नहीं बरती गई और देश की कैबिनेट को भी इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई थी?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो में हुए बम विस्फोटों के पीछे जिन लोगों के नाम सामने आए हैं वे स्थानीय लोग ही हैं। लेकिन श्रीलंका सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन धमाकों के पीछे कहीं विदेशी कनेक्शन तो नहीं है।
 
खुफिया जांच एजेंसियों के अनुसार नेशनल तौहीद जमात के जहरान हासिम और उसके साथियों ने मिलकर आत्मघाती हमलों को अंजाम देने के लिए योजना बनाई थी। जानकारी के मुताबिक़, इस पूरी घटना को अंजाम देने से पहले हमलावरों ने इसकी बाकायदा एक रिहर्सल की थी। इसी के चलते उन्होंने 16 अप्रैल को विस्फोटक से भरी एक बाइक भी एक जगह पर छोड़ दी थी।

आतंकियों की पूरी योजना थी कि हमला 22 अप्रैल से पहले या बाद में हो। हमलावरों ने रैकी करने के बाद ऐसे आठ जगहों को चुना था जहां पर बड़ी संख्या में भारतीय आते हों। इन जगहों में होटल और चर्च शामिल थे। भारतीयों को निशाना बनाते हुए इस तरह के हमले हो सकते हैं, इस बारे में खुफिया जानकारी भारत ने 4 अप्रैल को ही श्रीलंका को दे दी थी।

भारतीय जांच एजेसियों ने श्रीलंका को पहले ही चेतावनी दे दी थी कि नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) नामक संगठन आत्मघाती हमलावरों के जरिये श्रीलंका के प्रमुख चर्चों और होटल्स में धमाके करने की साजिश रच रहा है। इसके साथ ही एनटीजे के निशाने पर कोलम्बो में स्थित भारतीय उच्चायोग भी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनटीजे एक मुस्लिम संगठन है। यह संगठन उस समय चर्चा में आया था जब इसने बुद्ध की मूर्तियों को तोड़ा था।

इन धमाकों के पीछे जिस 'नेशनल तौहीद जमात' आतंकी संगठन का हाथ बताया जा रहा है, वह एक इस्लामिक चरमपंथी संगठन है। भारत के राज्य तमिलनाडु में भी इसका एक ग्रुप एक्टिव है। फिलहाल अभी तक 'तौहीद जमात' या किसी अन्य आतंकी संगठन ने श्रीलंका बम धमाकों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इस हमले का पूरा शक तौहीद जमात पर ही है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तौहीद जमात हमेशा से अपने कट्टरपंथी संदेशों और वहाबी प्रचार-प्रसार के लिए जाना जाता रहा है। इस संगठन की श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में ज्यादा पकड़ है। जानकारी के मुताबिक़ श्रीलंका में यह कट्टरपंथी संगठन अपने कट्टरपंथी संदेशों का प्रसार करता है, साथ ही महिलाओं के लिए बुर्का पहनने पर जोर देना और शरिया कानून लागू कराने में इसका ज्यादा विश्वास है।