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आतंकियों के ख़िलाफ़ ‘कामयाब’ हो रही मोदी सरकार की नीति

25 Apr 2019
कश्मीर घाटी में सेना ने किया कई आतंकियों का सफाया, जैश-ए-मोहम्मद को नहीं मिल रहे कमांडर

APR 25 (WTN) – आतंक और आतंकियों के ख़िलाफ़ मोदी सरकार की कठोर कार्रवाई के कारण कश्मीर घाटी में कोई भी युवक अब आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना बनने को तैयार नहीं है। जानकारी के मुताबिक़, पुलवामा आतंकी हमले के बाद जैश के ख़िलाफ़ शुरू किए गए ताबड़तोड़ ऑपरेशन के कारण स्थानीय युवाओं में घबराहट का माहौल है। सेना की कार्रवाई का इतना ख़ौफ युवाओं में है कि कोई भी आतंकी संगठन का नेतृत्व करने को तैयार नहीं हो रहा है।

आतंकियों के ख़िलाफ़ आक्रमक रूख अपनाए भारतीय सेना ने भरोसा दिलाया है कि घाटी और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर आतंकियों के ख़िलाफ़ सेना का अभियान जारी रहेगा। साफ़ जाहिर है कि सेना अब आतंकियों को पहले की तरह सिर उठाने का मौका नहीं देने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय सेना ने इस साल अब तक 70 आतंकियों को मार गिराया है, जबकि 12 को गिरफ्तार किया है। वहीं 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद से सेना ने 41 आतंकियों को मार गिराया है, जिसमें से 25 आतंकी जैश के थे।

जैसा कि आप जानते हैं कि आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटक से लदी कार सीआरपीएफ के काफिले से टकरा दी थी, जिसके बाद हुए धमाके में 40 जवानों की मौत हो गई थी। पुलवामा आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद को ख़ास तौर से टारगेट करना शुरू कर दिया है। सेना ने सीधे जैश के टॉप कमांडर्स को निशाने पर लिया और उन्हें मार गिराया। जिसके बाद अब परिस्थितियां ऐसी हैं कि कोई भी स्थानीय युवक जैश का कमांडर बनने के लिए तैयार नहीं है।

सेना के अनुसार कश्मीर घाटी में स्थानीय युवाओं के जैश में भर्ती होने की संख्या में ज़बरदस्त गिरावट आई है। सेना ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद कई लोगों से सम्पर्क किया, जिसके बाद कई आतंकियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस सबसे बीच सेना का कहना है कि जो भी युवक आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हैं, वे आत्म समर्पण कर दें क्योंकि सेना से जंग वो नहीं जीत पाएंगे और देश के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि करने पर उन्हें मार दिया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल अभी तक सुरक्षाबलों ने 70 आतंकियों को मार गिराया है। इनमें से 41 आतंकियों को तो पुलवामा हमले के बाद जारी ऑपरेशन में मार गिराया गया है। वहीं साल 2018 में सेना, सीआरपीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 272 आतंकी मारे गए थे। इधर जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक़ पुलवामा हमले के बाद पत्थरबाज़ी की घटनाओं में भी कमी आई है।

मोदी सरकार की शुरू से ही नीति रही है कि आतंकियों पर किसी भी तरह से रहम नहीं किया जाए। सेना द्वारा चलाए गये ऑपरेशन ऑलआउट के बाद घाटी में बड़ी तादात में आतंकियों को मार गिराया गया है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बलों को मोदी सरकार ने पूरी छूट दी है, जिसके बाद अभी तक 41 आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। इस बारे में जानकारों का कहना है कि सुरक्षाबलों के ताबड़तोड़ ऑपरेशन के बाद घाटी के युवाओं में जो डर है वह कायम रहना चाहिए, जिसके कारण वे आतंकी संगठनों में शामिल नहीं हो सकें। यानी कि कहा जा सकता है कि आतंक और आतंकियों के ख़िलाफ़ मोदी सरकार की नीति सफल होती दिख रही है।