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मोदी की ‘कूटनीति’ के कारण ‘बदतर’ हुई पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, आईएमएफ से मिली ‘खैरात’ के बाद मिलेगी थोड़ी राहत!

13 May 2019
बदहाल पाकिस्तान को आईएमएफ से मिला बैल आउट पैकेज, मंत्रालयों की सम्पत्ति बेचकर जुटाई जा रही रक़म!

MAY 13 (WTN) – आतंक को बढ़ावा देने और मोदी सरकार की कूटनीति के कारण भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर होती जा रही है। अब खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने क़बूल किया है कि उनके देश के लोग बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। इमरान खान ने पाकिस्तान की कर्ज़ में डूबी अर्थव्यवस्था के उबरने तक देश के लोगों से 'मज़बूत बने रहने' की अपील की।
 
पुलवामा आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कई आर्थिक क़दम उठाए थे। जिसके बाद पाकिस्तान में पेट्रोल, डीज़ल, बिजली और गैस जैसे ज़रूरी आवश्यकताएं काफ़ी महंगी हो गई हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन दिनों कर्ज़ में डूबी हुई है, जिसके कारण वहां के लोगों को लगातार महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल अगस्त में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पाकिस्तान के पर लगातार कर्ज़ बढ़ता ही जा रहा है।
 
इधर पाकिस्तान अपने मित्र देशों से मदद की गुहार लगा रहा है, जिसके बाद पाकिस्तान को चीन ने 2.2 अरब डॉलर की मदद की है। कहा जा रहा है कि चीन की इस मदद से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति में थोड़ा इज़ाफा होगा। चीन के अलावा पाकिस्तान ने कुछ दिनों पहले सऊदी अरब से भी मदद ली है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत इन दिनों इतनी ख़राब चल रही है कि अलग-अलग तरीक़ों से रक़म जुटाने के प्रयास किये जा रहे हैं। हालत यह हो गई है कि रक़म जुटाने के लिए मंत्रालयों की सम्पत्ति तक बेची जा रही है।
 
लेकिन भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अब एक राहत की ख़बर आई है। प्रधानमंत्री इमरान खान की लगातार की गई अपील के बाद आईएमफ यानी कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान के लिए बैल आउट पैकेज स्वीकार कर लिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच रविवार को एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत आईएमएफ खस्ताहाल अर्थव्यवस्था वाले पाकिस्तान को तीन वर्षों में छह अरब डॉलर का ‘बेलआउट पैकेज’ देगा। फिलहाल स्टाफ स्तर पर हुए इस समझौते को अभी वाशिंगटन में आईएमएफ बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की औपचारिक मंज़ूरी मिलना बाक़ी है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2018-19 के लक्ष्य से लगभग आधी रही है। 2018-19 में पाकिस्तान की जीडीपी की विकास दर 3.3 प्रतिशत रही है, जो कि निर्धारित 6.2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफ़ी कम ही है। जानकारों के मुताबिक़, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यकाल के पहले साल में सभी प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन काफ़ी कमज़ोर रहा है।
 
पाकिस्तान में हाल ही में राष्ट्रीय लेखा समिति की समीक्षा बैठक में 2018-19 के आंकड़े जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को कृषि क्षेत्र में 3.8 प्रतिशत, उद्योग में 7.6 प्रतिशत और सेवा में 6.5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी, और इन्हीं कारणों से जीडीपी में 6.2 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन इन लक्ष्यों को इमरान खान सरकार में हासिल नहीं किया जा सका। रिपोर्ट के मुताबिक़, लक्ष्य की तुलना में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर मात्र 0.85 प्रतिशत रही। वहीं उद्योग और सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर क्रमश: 1.4 प्रतिशत और 4.7 प्रतिशत रही।
 
आंकड़ों से साफ़ जाहिर होता है कि पाकिस्तान अपने विकास के लक्ष्य से काफ़ी पिछ़ड़ गया है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मत है कि आतंक को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान की यह बदतर आर्थिक हालत एक ना एक दिन होना ही थी। ग़रीबी और अशिक्षा जैसे मुद्दों पर काम करने की बजाय पाकिस्तान ने भारत में आतंक फैलाने पर ज़्यादा फोकस किया। जिसका नतीजा यह रहा कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण पाकिस्तान पूरी दुनिया में अकेला पड़ता चला गया। मोदी सरकार ने पाकिस्तान से कई तरह के व्यापारिक रिश्ते भी ख़त्म कर लिये, जिसके बाद पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ख़राब होती चली गई।
 
तो कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की सफ़ल कूटनीति का ही नतीजा है कि आज पाकिस्तान की आर्थिक हालत इतनी ख़राब हो चुकी है। चीन जैसे देश पाकिस्तान को मदद तो दे रहे हैं, लेकिन इसके बदले में उसके संसाधनों का जमकर दोहन भी कर रहे हैं। वहीं आईएमफ से मिलने वाला बैल आउट पैकेज भी पाकिस्तान की खस्ता हो चुकी अर्थव्यवस्था के लिए बस एक सहारा मात्र ही है। इस बैल आउट पैकेज से पाकिस्तान की आर्थिक हालत में ज़्यादा सुधार होने की गुंजाइश नहीं है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान कितने जल्दी और किस तरह से इस आर्थिक संकट से बाहर आ पाता है?