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मानव संग्रहालय में असम के मोरान जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक आवास रचना से दर्शकों को अवगत कराया

14 May 2019

भोपाल 13 मई : इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आवास निर्माण कार्यशाला के अंतर्गत स्थानीय वास्तुकला से परिचय कराने हेतु आवास निर्माण के विभिन्न चरणों को स्थानीय जनजातियों द्वारा बनाकर दर्शकों को अवगत कराया जाता है। इसी तारतम्य में आज इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के वीथि संकुल प्रदर्शनी परिसर में असम के मोरान जनजातीय कलाकारों द्वारा विधिवत अनुष्ठानिक क्रिया कर किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संग्रहालय कर्मी उपस्थित थे।

इस अवसर पर संग्रहालय के एन. सकमाचा सिंह, संग्रहालय एसोसिएट ने कहा की  यह घर के सामने आंगन में स्थित अन्न भंडार घर है। जो कि अधिक दिलचस्प है इसकी संरचना अनुठी है। इसे 9 लकड़ियों के बड़े लट्ठे पर पंक्तिबद्ध रखा जाता है। इस लकड़ी के लट्ठे को लोरिकाई कहते हैं यह 3 से 5 फीट त्रिज्या वाले विशाल आकृति के होते है। मोरान संरचना में लोटिका का उपयोग संपूर्ण संरचना को मजबूत पकड़ बनाए रखता है पुराने समय में मोरान घर हाथियों के नाम पर भी बनाये जाते थे और ये लोग इस अनाज भंडार में रखे अनाज का उपयोग अपने लिए कभी नहीं करते, इसका उपयोग वे हाथियों के देखभाल के लिए खर्च किया करते थे।



मोरान घर चार भुजाओं बाला ढांचा जो बांस को फाड़कर सींक को इस प्रकार एक-दूसरे से बनुकर बनाया जाता है पुरा घर लकड़ी के लट्ठे पर ही रखा होता है। उपर छत का निर्माण टोकों पत्ते या जेंगू पत्ता, के सहारे से आकृति में किया गया है। ऐसा विश्वास किया जाता है, कि मोरान घर के अंदर रखा सुरक्षित अनाज को मोरान घर के सामने संकल से बंधे हाथी द्वारा खाया जाता है। मोरान घर के बाहारी दीवारों का इस्तेमाल हाथियों को बांधने के बड़ी-बड़ी रस्सियों को लटकाने और कृषि औजार तथा मछली पकड़ने के उपकरण को लटकाकर रखने के लिए किया जाता है। (1) गुहली घोर (गाय का शेड़), (2) तंतोरहली (कपडे़ बुनने का शेड़) एवं (3) हाहोर घोरल (बतख का बाड़ा)।



गुहली घोर आमतौर पर सोरा घर (मुख्य घर) के दक्षिण दिशा में बनाया जाता है यह एक शेड होता है इसके चारों ओर दीवाल नहीं होता। यहां पर पालतू गाय और बैल को रखने के लिए किया जाता है। तंतोरहली शेड में हाथ से बनाई करने के करघे तथा बुनाई से संबंधित सामाग्री को रखा जाता है। घर की महिला सदस्यों द्वारा कपड़ा बुनने का कार्य किया जाता है। सोरा घर के पश्चिम दिशा में हाहोरा घोर का शेड बना है। गोलाकार बांस से बना बाड़ा है और उपर की तरफ छोटा है इस घर का उपयोग बतख, हंस आदि रखने के लिए किया जाता है। मोरान जनजातीय में हाथी रखना गर्व और प्रतिष्ठा का विषय होता है और इस जनजातीय की पहचान भी हाथी से है। मोरान घर की पारंपरिक डिजाइन और संरचना पर्यावरणीय परिस्थितियों द्वारास निर्धारित कर सांस्कृतिक लक्षणों जो हाथियों के साथ उनके सदियों पुराने सह अस्तित्व और सामांज्य पूर्ण संबंध को स्पष्ट करता है।

मोरान पारंपरिक आवास के सामाग्री को उनके गांव से संग्रहालय लाकर और असम राज्य के तिनसुखिया जिले के गांव से मोरान जनजातीय  कलाकारों को आंमत्रित कर इस पारंपरिक आवास का निर्माण कर अपने सांस्कृतिक समानों के  प्रार्दशों का प्रदर्शन किया है। - Window To News