HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

सावधान! व्हाट्सएप हो सकता है हैक

14 May 2019
एक वॉयस कॉल के जरिये हैक हो सकता था व्हाट्सएप, कम्पनी ने सुधारी अपनी ख़ामी
 
MAY 14 (WTN) – यदि आपके पास स्मार्टफ़ोन है तो आप व्हाट्सएप का प्रयोग तो करते ही होंगे। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया के सबसे ज़्यादा यूज किये जाने वाले इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप में एक बहुत बड़ी ख़ामी पाई गई थी।



आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस ख़ामी के कारण हैकर्स किसी फ़ोन में रिमोटली सेंध लगा सकते थे। जानकारी के मुताबिक़, यह सेंध सरकारी लेवल के टूल से की गई थी जो आम तौर पर किसी सरकार को दिया जाता है।



जानकारों के मुताबिक़, व्हाट्सएप की इस सिक्योरिटी ख़ामी का फायदा उठा कर टार्गेट यूजर के स्मार्टफ़ोन को स्पाइवेयर के जरिए इनफेक्ट किया जा सकता था। इस सबके लिए सिर्फ़ एक वॉयस कॉल की ज़रूरत होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टार्गेट नम्बर पर वॉयस कॉल करके व्हाट्सएप की इस ख़ामी का फ़ायदा उठाते हुए उस मोबाइल में स्पाइवेयर इंस्टॉल किया जा सकता था।



लेकिन इस मामले में सबसे गम्भीर बात यह है कि इस ख़ामी का फ़ायदा उठाने वाला हैकर सीधे ही टार्गेट स्मार्टफ़ोन को अपने कंट्रोल में ले सकता था, और इसके लिए टार्गेट को स्मार्टफ़ोन में कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं थी। इस तरह से हैकर टार्गेट नम्बर पर चैट्स, कॉल, माइक्रोफ़ोन, कैमरा, फ़ोटो और कॉन्टैक्ट्स सहित स्मार्टफ़ोन में मौजूद सभी संवेदनशील डेटा को ऐक्सेस कर सकता था।



वहीं व्हाट्सएप ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि चैट ऐप की इस ख़ामी के कारण व्हाट्सएप में सिर्फ़ मिस्ड कॉल करके इसे स्पाइवेयर से इन्फेक्ट किया जा सकता है। लेकिन अब इसे फिक्स कर लिया गया है यानी कि अब यह कमी व्हाट्सएप में नहीं है।

 

इस बारे में व्हाट्सएप का कहना है कि कम्पनी ने इस ख़ामी को मई के शुरुआत में ढूंढा था, और इसके लिए एडवांस्ड साइबर ऐक्टर ज़िम्मेदार था। एडवांस्ड साइबर ऐक्टर्स ने इस मैलवेयर से कितने नम्बर्स को इन्फेक्ट किया है फ़िलहाल यह नहीं बताया जा सकता है।



वहीं व्हाट्सएप ने इस बारे में कहा है कि इस अटैक में वे सभी हॉलमार्क शामिल हैं जो प्राइवेट कम्पनी में होते हैं, और जो सरकार के साथ मिलकर फ़ोन को प्रभावित करने का काम करती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, यह कम्पनी इजरायल की NSO ग्रुप की है, जिसका पेगस सॉफ्टवेयर राइट ऐक्टिविस्ट के ख़िलाफ़ उपयोग किया गया है।