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जानिए क्यों बर्बाद हो रही है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था?

22 May 2019
पाकिस्तान में विदेशी निवेश में आई भारी कमी, बर्बादी की कगार पर पाकिस्तान की अर्थव्यस्था!
 
MAY 22 (WTN) – पूरी दुनिया में एक असफ़ल देश के रूप में कुख्यात पाकिस्तान की आर्थिक हालत किसी से भी छिपी हुई नहीं है। अपनी ही नीतियों के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आज बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत यह हो गई है कि बदहाली से बचने के लिए पाकिस्तान को आईएमएफ से कड़ी शर्तों पर बेलआउट पैकेज लेना पड़ा है, और इस बेलआउट पैकेज के बाद पाकिस्तान के लोगों पर महंगाई और टैक्स की मार पड़ने वाली है।

भारत में आतंक फैलाने में अपनी पूरी ऊर्जा खर्च करने वाले पाकिस्तान को चीन पर हमेशा से काफ़ी विश्वास रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि समय-समय पर चीन ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद की है। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि विस्तारवादी चीन कहने को तो एक साम्यवादी देश है, लेकिन उसकी विदेशी नीति पूंजीवादी है। जहां उसे फ़ायदा दिखता है उसी देश के साथ राजनीतिक और व्यापारिक सम्बन्ध चीन रखता है।  

लेकिन पाकिस्तान का दोस्त चीन अब पाकिस्तान से धीरे-धीरे दूरी बना रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन का पाकिस्तान में निवेश 72 प्रतिशत तक कम हो गया है। चीन के निवेश कम करने से इसका बहुत बड़ा असर पाकिस्तान की जनता पर पड़ रहा है। पाकिस्तान में चीन के निवेश में ही नहीं बल्कि विदेशी निवेश में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। आपकी जानकारी के लिे बता दें कि पाकिस्तान में विदेशी निवेश में 42.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, और यह गिरकर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

इधर, पाकिस्तान के शीर्ष बैंक स्‍टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्‍तान ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर करने के बाद चेतावनी जारी की है। स्‍टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्‍तान द्वारा जारी यह चेतावनी आईएमएफ की ओर से पाकिस्‍तान को मिल रहे 6 अरब डॉलर के पैकेज के दौरान जारी की गई। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान को आईएमएफ से मिलने वाले बेलआउट पैकेज को लेकर और जटिल हालात बन सकते हैं, क्योंकि इसकी ब्याज दर और भी ज़्यादा हो सकती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिनों दिन डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्‍तानी रुपया कमज़ोर होता जा रहा है। हालत यह है कि मार्च के महीने में पाकिस्‍तान में महंगाई दर पिछले पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर 9.41 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। वहीं अप्रैल के महीने में इसे 8.8 प्रतिशत दर्ज किया गया था। अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होते रुपये के कारण पाकिस्तान का हर तबका महंगाई की मार झेल रहा है और परेशान हो रहा है।

पाकिस्तान में निर्यात की तुलना में आयात ज़्यादा होता है। ऐसे में अमेरिकी डॉलर की क़ीमत बढ़ने से पाकिस्तान को आयात पर ज़्यादा रकम खर्च करना पड़ती है। यदि डॉलर लगातार महंगा होता चला गया, तो पाकिस्तान की आर्थिक हालात और भी ज़्यादा बिगड़ सकती है।  

साफ़ है कि अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होते पाकिस्तानी रूपये की वजह से महंगाई लगातार बढ़ रही है। वहीं भविष्‍य में महंगाई को लेकर चल रही अपेक्षाओं के कारण राजकोषीय घाटा भी बढ़ना तय है। यहीं वो कारण है जिसके कारण पाकिस्‍तान में सामान के दाम बढ़ रहे हैं। अब जबकि चीन के साथ-साथ अन्य विदेशी देशों का निवेश भी पाकिस्तान में कम होता जा रहा है। ऐसे में तय है कि यदि समय रहते पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक नीति नहीं सुधारीं, तो जल्द ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बिखर जाएगी।