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ब्रांड मोदी की जीत!

23 May 2019
ब्रांड मोदी के दो बड़े स्तम्भ; हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद

MAY 23 (WTN) – इसे यदि ब्रांड मोदी की जीत कहा जाए तो यह ज़्यादा सही होगा। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में ऐसा पहली बार हुआ है कि कांग्रेस के अलावा किसी दूसरी पार्टी ने अपने दम पर लोकसभा चुनाव में फ़िर से बहुमत हासिल किया हो। पिछले लोकसभा चुनाव में जब नरेन्द्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाया था, तो सभी को संशय था कि क्या भाजपा मोदी के सहारे जीत हासिल कर सकेगी। सवाल काफ़ी थे, लेकिन मोदी ने कांग्रेस के दस सालों के शासन के ख़िलाफ़ जनता के गुस्से का भरपूर फायदा उठाया और अपने दम पर भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कराई।

2014 में नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो उनके सामने कई चुनौतियां थीं। मोदी ने इन चुनौतियों का डटकर सामना किया और भाजपा को अन्दर ही अन्दर मज़बूत करते रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ पांच साल की सत्ता विरोधी लहर थी, लेकिन मोदी जानते थे कि चुनाव कैसे जीता जाता है। मोदी ने अपनी इसी रणनीति पर काम किया और भाजपा को जीत दिलाई। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत भाजपा और एनडीए की जीत नहीं है, बल्कि यह जीत ब्रांड मोदी की जीत है।

नरेन्द्र मोदी की राजनीति अपने आप में सबसे अलग है। ब्रांड मोदी के दो सबसे स्तम्भ हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद थे, जिनके दम पर मोदी ने विरोधियों को बुरी तरह से परास्त किया। नरेन्द्र मोदी ने कभी भी अपनी हिन्दुत्ववादी छवि को किसी के सामने नहीं छिपाया। वहीं राष्ट्रवाद भी ब्रांड मोदी का एक ऐसा मज़ूबत स्तम्भ है, जिसके दम पर मोदी ने देश की जनता को एकजुट कर जीत हासिल की।
 
नरेन्द्र मोदी की एक सबसे ख़ास पहचान है हिन्दुत्व, और अपने हिन्दुत्वादी होने पर ना केवल उन्हें गर्व है, बल्कि वे हिन्दुत्व की विचारधारा को पूरी दुनिया के सामने रखते भी हैं। मोदी विपक्ष पर आरोप लगाते रहे कि विपक्ष ने भगवा आतंकवाद के नाम पर हिन्दुत्व को बदनाम करने की कोशिश की है, और इसी के जवाब में मोदी ने खुद को और भी ज़्यादा हिन्दुत्ववादी बताया। कांग्रेस के भगवा आतंकवाद की थ्योरी का जवाब देने के लिए ही नरेन्द्र मोदी ने भोपाल सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारा।

यानी कि साफ़ जाहिर है कि ब्रांड मोदी के हिन्दुत्ववादी चेहरे ने भाजपा को जमकर फ़ायदा पहुंचाया है। अपनी हिन्दुत्ववादी छवि के कारण ही मोदी ने वाराणसी जैसी धार्मिक नगरी से चुनाव लड़ा, और समय-समय पर मन्दिरों में दर्शन के जरिये उन्होंने देश की बहुसंख्यक हिन्दू जनता को सन्देश दिया कि वे उनके नायक हैं।

अब बात करें ब्रांड मोदी के दूसरे सबसे बड़े स्तम्भ राष्ट्रवाद की, तो जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कठोर नीतियां अपनाई हैं, उससे पूरे देश में सन्देश गया कि आतंकवाद और पाकिस्तान से सबसे बेहतरीन तरीक़े से सिर्फ़ मोदी ही निपट सकते हैं। मोदी सरकार को इस बात का श्रेय जाता है कि उनके कार्यकाल में किसी भी आतंकी घटना में एक भी नागरिक की मौत नहीं हुई। प्रधानमंत्री मोदी खुद इस बात को कई बार चुनाव प्रचार में कहते रहे कि उनके शासन में आतंकियों में हिम्मत नहीं हुई कि वे भारत में बम विस्फोट कर सकें।

वहीं पाकिस्तान की बात करें, तो मोदी सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान को अच्छी तरह से सबक सिखाया गया। आतंकियों के ख़िलाफ़ मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक और एअर स्ट्राइक ये वे दो बड़े फ़ैसले थे, जिसके बाद देश की जनता को विश्वास हो गया है कि नरेन्द्र मोदी सरकार ही पाकिस्तान में जाकर आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकती है। मोदी सरकार ने कश्मीर में आतंकियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन ऑल आउट चलाया और आतंकियों का जमकर सफाया किया, आतंकियों के ख़िलाफ़ मोदी सरकार की यही इच्छाशक्ति वोट बैंक में तब्दील हो गई।

पुलवामा हमले के बाद जिस तरह से मोदी सरकार ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कूटनीतिक कार्रवाई की, उसी का नतीजा है कि देश की जनता ने मोदी सरकार पर एक बार फ़िर से विश्वास जताया है मोदी सरकार की पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद देश की जनता में मोदी सरकार के प्रति एक सकारात्मक सन्देश गया। आज की तारीख में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की जो बदहाली हो रही है, इसके पीछे भी भारत के लोगों ने मोदी सरकार की कूटनीति की तारीफ की।

वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा ही देश के सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव रखा, जिसका काफ़ी प्रभाव देश की जनता पर पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले पांच साल के कार्यकाल में हर दिवाली देश के सैनिकों के साथ मनाई, जिसका एक बहुत बड़ा सन्देश के लोगों के सामने गया कि मोदी के लिए देश के सैनिक ही उनका परिवार हैं।

हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद, ये वे दो बड़े मोदी ब्रांड है जिसके दम पर एक बार फ़िर से भाजपा को बहुमत हासिल हो सका है। मोदी ने खुलकर हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा को सबके सामने फॉलो किया और देश की जनता के समाने स्पष्ट सन्देश दिया कि यही दो विचारधाराओं के दम पर वे शासन करेंगे।

अब जबकि भाजपा के नेतृत्व में एनडीए फ़िर से सरकार बनाने जा रही है, तो ऐसे में साफ़ है कि विपक्ष के आरोपों और पांच साल की सत्ता विरोधी लहर के बाद भी यदि भाजपा की जीत हुई, तो यह जीत है ब्रांड मोदी की, यह जीत है मोदी की विचारधारा की, यह जीत है मोदी के विजन की और यह जीत है मोदी की हिन्दुत्ववादी और राष्ट्रवादी विचारधारा की।