HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

​मोदी लहर में धराशायी हुए कांग्रेस के नौ पूर्व मुख्यमंत्री!

24 May 2019
शीला, शिंदे, दिग्विजय, हुड्डा और मोईली समेत कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्रियों की ‘करारी हार’

MAY 24 (WTN) – लोकसभा चुनाव में भाजपा को जो ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है, उसकी भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अलावा कोई दूसरी पार्टी ने लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल किया हो। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत का पूरा श्रेय नरेन्द्र मोदी को जाता है। 2019 की भाजपा की जीत 2014 से बड़ी कही जा रही है, क्योंकि विपक्ष के एकजुट होने और सत्ता विरोधी लहर होने के बाद भी विपक्ष को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

मोदी लहर में यदि सबसे ज़्यादा किसी पार्टी का नुकसान हुआ है, तो वह है कांग्रेस। 2014 के लोकसभा चुनाव में 44 सीटों पर सिमटी कांग्रेस इस लोकसभा चुनाव में दोगुनी सीटों पर भी जीत हासिल नहीं कर सकी। कांग्रेस की इस चुनाव में इतनी बुरी तरह से हार हुई है कि कई राज्यों में कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी है। राजस्थान जहां पर कि कांग्रेस की सरकार है, वहां पर कांग्रेस सभी 25 सीटों पर हार गई। कांग्रेस की हार कितनी बड़ी है कि इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्री लोकसभा चुनाव में हार गये।

जीहां जिनके दम पर कभी राज्यों में कांग्रेस ने सालों शासन किया था, कांग्रेस के वे दिग्गज मुख्यमंत्री मोदी लहर में चुनाव नहीं जीत सके। कांग्रेस के दिग्गज नेता और 10 साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपेन्द्र हुड्डा को सोनीपत से भाजपा प्रत्याशी रमेश कौशिक ने करारी शिकस्त दी। वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के महासचिव हरीश रावत भी अपनी सीट नहीं बचा सके। हरिद्वार सीट से हरीश रावत को भाजपा के अजय भट्ट ने पटखनी दी।
 
बात करें महाराष्ट्र की तो यहां पर पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण नांदेड से इस बार अपनी सीट नहीं बचा सके। अशोक चव्हाण को भाजपा के प्रतापराव पाटिल ने हराया। वहीं देश पूर्व गृहमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे भी अपनी पारम्परिक सीट सोलापुर से चुनाव हार गये। शिंदे को भाजपा के जय सिद्धेश्वर शिवारचरी ने डेढ़ लाख से भी ज़्यादा वोटों से हराया।

15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है। उत्तर-पूर्व दिल्ली से शीला दीक्षित को दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बुरी तरह से हराया। मध्य प्रदेश के 10 सालों तक मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को भी जनता ने सबक सिखाया। भोपाल सीट से चुनाड़ लड़े दिग्विजय सिंह को भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने साढ़े तीन लाख से भी ज़्यादा मतों से परास्त किया।
 
बात करें उत्तर पूर्व की तो अरुणाचल प्रदेश पश्चिम सीट पर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी को भी हार का सामना करना पड़ा। तुकी को केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने डेढ़ लाख से भी ज़्यादा मतों से करारी शिकस्त दी। उधर, 8 साल तक मेघालय के मुख्यमंत्री रहे मुकुल संगमा को भी इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। मुकुल संगमा को पूर्व केन्द्रीय मंत्री और एनपीपी की नेता आगाथा संगमा ने तौरा सीट से साठ हज़ार से भी ज़्यादा मतों से हराया।

वहीं दक्षिण के राज्य कर्नाटक में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोईली को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है। मोईली अपनी पारम्परिक सीट चिकबल्लपुर से चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें भाजपा के बीएन बच्चे गौड़ा ने बुरी तरह से हराया।

तो देखा आपने कि मोदी लहर में बड़े बड़े कांग्रेसी नेताओं को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। ये वे कांग्रेस के नेता हैं जिनके दम पर कांग्रेस ने सालों तक कई राज्यों में शासन किया, लेकिन मोदी सरकार की नीति और नीयत के सामने इन्हें हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के पास अब 5 साल का समय है कि वो शून्य से शुरू करे और फ़िर खड़ा होने की कोशिश करे। कांग्रेस को यदि मोदी का मुक़ाबला करना है, तो उसे अपनी नीति, नीयत और नेताओं पर फ़िर से विचार करना पड़ेगा।